खैरागढ़ , जनवरी 21 -- छत्तीसगढ़ राज्य में खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने पाम ऑयल की खेती करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर अनुदान के साथ अतिरिक्त टॉप-अप अनुदान देने का निर्णय लिया है।

यह अतिरिक्त सहायता राशि अंतरवर्ती फसल, रख-रखाव, ड्रिप सिंचाई और फेंसिंग जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर कृषि विभाग द्वारा इस नई व्यवस्था को स्वीकृति दी गई है, जिससे किसानों को दीर्घकालीन आर्थिक लाभ मिलेगा।

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा 60:40 के अनुपात में कुल 1.30 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान पहले से दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा 69,620 रुपये प्रति हेक्टेयर का टॉप-अप अनुदान स्वीकृत किया गया है।

नई व्यवस्था के अंतर्गत रख-रखाव के लिए पहले से मिल रहे 5,250 रुपये के अलावा 1,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, अंतरवर्ती फसल के लिए 5,250 रुपये के साथ 5,000 रुपये प्रति हेक्टेयर, ड्रिप सिंचाई पर 14,130 रुपये के अतिरिक्त 8,635 रुपये प्रति हेक्टेयर का टॉप-अप दिया जाएगा। वहीं, पहली बार फेंसिंग के लिए 54,485 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान भी प्रदान किया जाएगा।

ऑयल पाम एक दीर्घकालीन एवं लाभकारी फसल है, जिसमें रोपण के चौथे वर्ष से उत्पादन प्रारंभ होकर लगभग 30 वर्षों तक निरंतर आय प्राप्त होती है। पारंपरिक तिलहनी फसलों की तुलना में इसकी तेल उत्पादन क्षमता चार से छह गुना अधिक मानी जाती है।

किसानों को ऑयल पाम खेती से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराने के उद्देश्य से जिले के 75 कृषकों को महासमुंद जिले के ग्राम बलेशर स्थित ऑयल पाम प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया गया, जहां सफलतापूर्वक इस फसल की खेती की जा रही है।

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