रायपुर , जून 17 -- छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के विभिन्न शहरों में पांच प्रमुख पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए निविदाएं जारी कर दी हैं। इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा किया जाएगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार की पुनर्विकास नीति के अंतर्गत रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कोरबा और जगदलपुर में स्थित शासकीय परिसंपत्तियों का पुनर्विकास किया जाएगा। आवास एवं पर्यावरण विभाग को इस योजना का नोडल विभाग तथा गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को क्रियान्वयन एजेंसी बनाया गया है।

परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किए जा चुके हैं। साथ ही निजी डेवलपर्स के चयन के लिए पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई है। मंत्रिपरिषद से सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में परियोजनाओं के अंतिम स्वरूप को मंजूरी दी गई।

प्रस्तावित पांचों परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है तथा वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के आधार पर इनका अनुमानित मूल्य लगभग 250.30 करोड़ रुपये आंका गया है। ये परियोजनाएं रायपुर के बी.टी.आई. रोड शंकर नगर, महासमुंद के क्लब पारा, राजनांदगांव के कैलाश नगर, कोरबा के कटघोरा तथा जगदलपुर के चांदनी चौक फेज-2 क्षेत्र में विकसित की जाएंगी।

राजधानी रायपुर में बी.टी.आई. ग्राउंड के सामने तथा सिंधु भवन के समीप प्रस्तावित परियोजना को विशेष महत्व का माना जा रहा है। यह क्षेत्र शैक्षणिक, प्रशासनिक, व्यावसायिक और आवासीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। परियोजना के विकसित होने से आधुनिक शहरी अधोसंरचना को बढ़ावा मिलने के साथ शासकीय परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

पुनर्विकास मॉडल के अंतर्गत जर्जर एवं अनुपयोगी शासकीय परिसंपत्तियों के स्थान पर आधुनिक सुविधायुक्त अधोसंरचना विकसित की जाएगी। परियोजनाओं के लिए अलग से वित्तीय संसाधन जुटाने की आवश्यकता नहीं होगी बल्कि शासकीय भूमि के मूल्य का उपयोग ही वित्तीय आधार के रूप में किया जाएगा। इससे सार्वजनिक भूमि का बेहतर उपयोग होने के साथ राज्य को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। पुनर्विकास नीति के माध्यम से जर्जर एवं अनुपयोगी परिसंपत्तियों को आधुनिक एवं उपयोगी अधोसंरचना में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे शहरों की कार्यक्षमता और सौंदर्य दोनों में वृद्धि होगी।

गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मंडल राज्य में पुनर्विकास की नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है और यह पहल केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों के समग्र कायाकल्प का प्रयास है।

मंडल के आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने भी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए आगामी पुनर्विकास की आठ नई परियोजनाओं के प्रस्ताव शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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