दुर्ग , सितंबर 23 -- छत्तीसगढ़ में जेल सुधार और बंदियों के पुनर्वास की दिशा में पहल करते हुए प्रदेश का पहला ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन (खुला जेल), दुर्ग केंद्रीय जेल में शुरू किया गया है। डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने मंगलवार शाम इसका औपचारिक शुभारंभ किया। इस दौरान जेल अधीक्षक मनीष संभाकर सहित जेल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बंदी मौजूद रहे।

नई व्यवस्था के तहत अच्छे आचरण और निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले बंदियों को सामान्य जेल व्यवस्था से अलग नियंत्रित परिस्थितियों में काम करने का अवसर मिलेगा। खुली जेल में फिलहाल 30 बंदियों के रहने की व्यवस्था की गई है। चयनित बंदी सुबह निर्धारित काम के लिए जेल परिसर से बाहर जा सकेंगे और दिनभर काम करने के बाद शाम 6 बजे तक वापस जेल लौटना होगा।

जेल प्रशासन के अनुसार खुली जेल परिसर के अंदर ही संचालित की जा रही है। इसके तहत बंदी जेल परिसर की कैंटीन, गौशाला और अन्य स्थानों पर काम कर सकेंगे। शुरुआती चरण में नौ बंदियों को काम के लिए बाहर जाने की अनुमति दी जाएगी।

जेल अधीक्षक मनीष संभाकर ने कहा, "शुरुआत में नौ बंदियों को काम के लिए बाहर जाने की अनुमति दी जाएगी. यानी बंदियों को जेल की चारदीवारी के भीतर रखने के साथ-साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किया जाएगा।"श्री संभाकर ने बुधवार को बताया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल बंदियों को काम के लिए बाहर भेजना नहीं है, बल्कि उनमें अच्छे आचरण, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना भी है। निर्धारित मानदंडों के आधार पर अच्छे आचरण वाले बंदियों का चयन कर उन्हें नियंत्रित व्यवस्था में काम करने का अवसर दिया जाएगा।

ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन के लिए अलग से नया परिसर तैयार नहीं किया गया है। दुर्ग केंद्रीय जेल में पहले से उपलब्ध अधोसंरचना का उपयोग करते हुए यह व्यवस्था विकसित की गई है। जेल प्रशासन का मानना है कि इस पहल से बंदियों के सुधार और पुनर्वास के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा में दोबारा स्थापित करने की प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी।

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