रायपुर , जून 30 -- छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के दौरान किसानों को पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा देने तथा खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए राज्यभर में निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है।

कृषि विभाग के अनुसार 26 जून 2026 की स्थिति में राज्य में नैनो डीएपी की लगभग 2.47 लाख बोतलों का भंडारण किया गया है, जिनमें से 87 हजार से अधिक बोतलों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। इसी प्रकार नैनो यूरिया की लगभग 2.86 लाख बोतलों का भंडारण किया गया है तथा 1.14 लाख से अधिक बोतलों का वितरण किया जा चुका है। शेष उपलब्ध स्टॉक सहकारी समितियों में सुरक्षित रखा गया है, जिससे आगामी कृषि कार्यों के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए किसानों को आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल विकल्प के रूप में नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के प्रयोग से उर्वरक की खपत कम होती है, पौधों द्वारा पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण होता है, उत्पादन लागत घटती है तथा फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ती है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता एवं पर्यावरण संरक्षण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस बीच जांजगीर-चांपा जिले में भी खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। सहकारी क्षेत्र में 39,200 मीट्रिक टन वितरण लक्ष्य के विरुद्ध 21,362 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जबकि 7,826 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। निजी क्षेत्र में 26,130 मीट्रिक टन लक्ष्य के मुकाबले 13,487 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है तथा 10,150 मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है। नवागढ़ विकासखंड की सेवा सहकारी समिति मुनुंद में यूरिया, डीएपी, एनपीके, जिंकेटेड सुपर फॉस्फेट तथा नैनो उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है।

अधिकारियों के अनुसार किसानों को उनके कृषि रकबे के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। किसानों की सुविधा के लिए अवकाश दिवसों में भी समितियां संचालित की जा रही हैं। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय निरीक्षक दल निजी कृषि केंद्रों का नियमित निरीक्षण कर रहा है तथा अनियमितता पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

कबीरधाम जिले में भी सहकारी क्षेत्र में 57,200 मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध 32,700 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया गया है, जबकि डबल लॉक केंद्रों में 5,668 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध हैं। अब तक 21,151 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। निजी क्षेत्र में 10,457 मीट्रिक टन भंडारण के मुकाबले 7,639 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया है।

कृषि विभाग ने बताया कि डीएपी के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एनपीके, टीएसपी तथा एसएसपी जैसे उर्वरकों के उपयोग के संबंध में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी एवं अधिक मूल्य पर बिक्री रोकने के लिए गठित उड़नदस्ता दल तथा उर्वरक निरीक्षकों ने अब तक 170 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया है। निरीक्षण के दौरान दो विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं तथा 40 कृषि केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए निगरानी अभियान लगातार जारी रहेगा।

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