रायपुर, अप्रैल 13 -- छत्तीसगढ़ में आगामी जनगणना को लेकर राज्य सरकार ने विस्तृत तैयारी पूरी कर ली है। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ और जनगणना कार्य निदेशक कार्तिकेय गोयल ने राजधानी रायपुर में सोमवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि जनगणना प्रक्रिया इस बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न की जाएगी और इसे दो चरणों में आयोजित किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, पहला चरण मकान सूचीकरण और आवास गणना का होगा, जो एक मई से 30 मई तक संचालित किया जाएगा। इसके बाद दूसरा चरण फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना के रूप में आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस बार आम नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने की सुविधा भी दी जाएगी। स्व-गणना की यह प्रक्रिया 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक उपलब्ध रहेगी, जिसके पश्चात प्रत्येक परिवार को एक विशेष एई आईडी प्रदान की जाएगी। इसके बाद प्रगणक घर-घर जाकर दी गई जानकारी का सत्यापन करेंगे।

प्रथम चरण के दौरान घर-घर सर्वे में लगभग 33 बिंदुओं पर जानकारी एकत्र की जाएगी। इसमें मकान से संबंधित विवरण जैसे भवन नंबर, दीवार, छत और फर्श की स्थिति, मकान का उपयोग और उसकी अवस्था शामिल होगी। वहीं परिवार से जुड़े प्रश्नों में कुल सदस्यों की संख्या, परिवार प्रमुख का नाम, लिंग, सामाजिक वर्ग, मकान स्वामित्व, कमरों की संख्या और विवाहित जोड़ों की जानकारी ली जाएगी।

इसके अतिरिक्त सर्वे में मूलभूत सुविधाओं से जुड़े प्रश्न भी शामिल रहेंगे, जैसे पेयजल स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति, रसोई और ईंधन का प्रकार, जल निकासी व्यवस्था तथा स्नान की सुविधा। डिजिटल संसाधनों के अंतर्गत टीवी, इंटरनेट, कंप्यूटर, मोबाइल आदि की उपलब्धता की जानकारी भी ली जाएगी। साथ ही परिवार के पास उपलब्ध वाहनों, उपभोग किए जाने वाले प्रमुख अनाज तथा मोबाइल नंबर जैसी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल ऐप के माध्यम से संचालित होगी और सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रखे जाएंगे। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत एकत्रित जानकारी का उपयोग किसी भी कानूनी या जांच कार्यवाही में नहीं किया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि गलत जानकारी देने या सर्वे में सहयोग नहीं करने पर संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें अधिकतम 1,000 रुपये तक का जुर्माना शामिल है।

राज्य में इस कार्य के लिए लगभग 62,500 अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इनमें 47 जिला जनगणना अधिकारी, 250 जिला स्तरीय अधिकारी, 472 चार्ज अधिकारी, 1,160 मास्टर ट्रेनर, 51,300 प्रगणक और 9,000 पर्यवेक्षक शामिल हैं।

जनगणना कार्य राज्य के सभी 33 जिलों, 195 नगरीय निकायों, 252 तहसीलों और लगभग 19,978 गांवों में संपन्न कराया जाएगा। इसके लिए करीब 49,000 मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं। साथ ही नागरिकों की सहायता के लिए 16 अप्रैल 2026 से टोल-फ्री नंबर 1855 भी जारी किया जाएगा। प्रवासियों की गणना को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है।

अधिकारियों के अनुसार, किसी व्यक्ति की गणना उसके स्थायी या मूल निवास स्थान के आधार पर की जाएगी। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति मध्य प्रदेश का निवासी है और वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कार्यरत है, तो उसकी गणना उसके मूल राज्य में ही की जाएगी।

श्री गोयल ने बताया कि यह स्वतंत्रता के बाद देश की आठवीं जनगणना होगी और दूसरी बार यह पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में आयोजित की जा रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस बार दूसरे चरण में जातिगत जनगणना को भी शामिल किया जाएगा।

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