रायपुर , जुलाई 05 -- छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। लगातार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनने लगी है। इस बीच मौसम विभाग ने अगले 24 और 48 घंटों के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में तेज बारिश की चेतावनी जारी करते हुए रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट घोषित किया है।
मौसम विभाग के अनुसार, बिलासपुर और बस्तर संभाग के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, प्रदेश में अब तक मौसमी बारिश सामान्य से 46 प्रतिशत कम रही है। विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों के दौरान मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ के अनेक जिलों में बारिश की गतिविधियां और तेज होंगी।
अगले 24 घंटों के लिए जारी पूर्वानुमान के तहत रायपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार, राजनांदगांव, बेमेतरा, महासमुंद, बालोद, धमतरी, गरियाबंद तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों में एक-दो स्थानों पर अत्यंत तेज बारिश का अनुमान लगाते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है।
इसी अवधि के लिए कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा तथा बिलासपुर संभाग के अन्य जिलों में बहुत तेज बारिश की आशंका के मद्देनजर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं सुकमा, बीजापुर और जशपुर जिलों में एक-दो स्थानों पर तेज बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट घोषित किया गया है।
अगले 48 घंटों के लिए जारी पूर्वानुमान में कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही तथा मुंगेली जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में बहुत तेज बारिश होने का अनुमान लगाया गया है।
इसी अवधि में बिलासपुर, बेमेतरा, दुर्ग, बालोद, नारायणपुर, बीजापुर, कोरबा, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया तथा कांकेर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि रायपुर, बलरामपुर, सरगुजा और सूरजपुर जिलों में एक-दो स्थानों पर तेज बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट घोषित किया गया है।
मौसम विभाग ने तेज बारिश के संभावित प्रभावों को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार, लगातार बारिश से कई स्थानों पर सड़कें फिसलनभरी हो सकती हैं तथा जलभराव के कारण प्रमुख शहरों में यातायात प्रभावित होने और यात्रा की अवधि बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा दृश्यता कम होने, निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने, नहरों पर बने निचले पुलों को बंद करने तथा खेतों में जलभराव की संभावना भी व्यक्त की गई है।
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