रायपुर , सितंबर 18 -- छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में कैंसर के मामलों की प्रभावी निगरानी और बीमारी से संबंधित सटीक आंकड़े जुटाने के उद्देश्य से कैंसर को 'अधिसूचित रोग' घोषित कर दिया है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर दी है।

नई व्यवस्था के तहत राज्य में सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ मेडिकल कॉलेज, पैथोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी लैब, रेडियोलॉजी और इमेजिंग सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर तथा कैंसर देखभाल से जुड़े अन्य संस्थानों को कैंसर के प्रत्येक पुष्ट अथवा संदिग्ध मामले की जानकारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सरकार को उपलब्ध करानी होगी।

अधिसूचना के अनुसार किसी मरीज में कैंसर की पहचान होने के एक महीने के भीतर संबंधित स्वास्थ्य संस्थान को इसकी सूचना देनी होगी। किसी मरीज में कैंसर की आशंका होने पर इलाज करने वाले चिकित्सक की जिम्मेदारी होगी कि वह उसे आवश्यक जांच के लिए भेजे। जांच में कैंसर की पुष्टि होने पर पैथोलॉजिस्ट को निर्धारित कैंसर नोटिफिकेशन फॉर्म भरकर बीमारी की पहचान के एक महीने के भीतर संबंधित प्राधिकारी को जानकारी देनी होगी।

राज्य में अभी कैंसर के मामलों की जानकारी मुख्य रूप से कैंसर रजिस्ट्री में स्वैच्छिक रूप से दर्ज की जाती है। इसके कारण कई मामले रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो पाते। सरकार का मानना है कि कैंसर को 'अधिसूचित रोग' घोषित करने से प्रदेश में बीमारी से संबंधित अधिक सटीक और व्यापक डेटा उपलब्ध हो सकेगा।

इसके तहत कैंसर के मामलों की जानकारी एक केंद्रीकृत पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। इस डेटा का उपयोग कैंसर की शुरुआती पहचान और उपचार व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ बीमारी की रोकथाम एवं नियंत्रण संबंधी नीति तैयार करने में किया जाएगा। इलाज की सुविधाओं के विस्तार, कैंसर रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने में भी यह जानकारी उपयोगी होगी।

नई प्रणाली से राज्य में कैंसर के मामलों की संख्या, बीमारी के फैलाव और इससे होने वाली मौतों में बदलाव की निगरानी की जा सकेगी। साथ ही कैंसर स्क्रीनिंग और उपचार से संबंधित सरकारी कार्यक्रमों के प्रभाव का आकलन भी किया जा सकेगा।

राज्य में फिलहाल तीन सरकारी कैंसर अस्पताल और दो सरकारी रेडियोथेरेपी यूनिट संचालित हैं। इसके अतिरिक्त 26 जिलों में जिला डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं, जबकि पांच और जिलों में ऐसे सेंटर शुरू करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वास्थ्य केंद्रों में कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।

नई व्यवस्था राज्य और केंद्र सरकार के सभी अस्पतालों, निजी अस्पतालों, डिस्पेंसरी, स्वास्थ्य संस्थानों और सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों पर लागू होगी। इसके दायरे में पैथोलॉजी, हेमेटोलॉजी लैब, इमेजिंग सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर और कैंसर की देखभाल करने वाली एनजीओ भी रहेंगी। कैंसर की जांच और उपचार से जुड़े डॉक्टरों एवं पैथोलॉजिस्ट को सामने आने वाले मामलों की जानकारी निर्धारित अवधि में सरकार को उपलब्ध करानी होगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित