रायपुर , जुलाई 17 -- छत्तीसगढ़ में किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और नकली तथा अमानक उर्वरकों पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने खरीफ सीजन के दौरान प्रवर्तन अभियान तेज किया है। विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 की तुलना में इस वर्ष प्रवर्तन कार्रवाई में 10.25 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष 44 मामलों के मुकाबले इस वर्ष अब तक 451 मामलों में कार्रवाई की गई है।

कृषि विभाग ने शुक्रवार को बताया कि कृषि मंत्री रामविचार नेताम के नेतृत्व तथा कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन में राज्यभर में उर्वरकों के भंडारण, विक्रय, वितरण और गुणवत्ता की सघन जांच की जा रही है। उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत की जा रही कार्रवाई का उद्देश्य किसानों को प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना और दोषी विक्रेताओं पर प्रभावी अंकुश लगाना है।

विभाग के अनुसार वर्ष 2025 की तुलना में न्यायालय में प्रस्तुत प्रकरणों की संख्या चार से बढ़कर 56 हो गई है। जब्ती की कार्रवाई दो से बढ़कर 98, लाइसेंस निलंबन तीन से बढ़कर 97, लाइसेंस निरस्तीकरण दो से बढ़कर 10 तथा विक्रय प्रतिबंध के मामले 33 से बढ़कर 183 हो गए हैं। विभाग ने पहली बार सात एफआईआर भी दर्ज कराई हैं।

विभाग का कहना है कि नियमित निरीक्षण, उर्वरकों के नमूनों की जांच, शिकायतों के त्वरित निराकरण और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई से किसानों का भरोसा बढ़ा है तथा कृषि आदानों की आपूर्ति व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनी है।

विभाग के अनुसार अभियान का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित कर किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि करना भी है। इसके लिए राज्यभर में सतत निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया जारी है।

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