रायपुर , सितंबर 09 -- छत्तीसगढ़ में पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्राकृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन के साथ ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे, फिल्म पर्यटन, डिजिटल सुविधाओं और लोकसंस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है।

नई औद्योगिक नीति में पर्यटन और होमस्टे को विशेष महत्व दिया गया है, ताकि गांवों में पर्यटकों के ठहरने से स्थानीय परिवारों को आय मिले। सूरजपुर की झील में विहान योजना और स्थानीय मिशनों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं बोटिंग, गाइड सेवा और हस्तशिल्प बिक्री जैसी गतिविधियों से प्रतिदिन लगभग 1,000 से 1,500 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।

राज्य में चित्रकोट को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सिरपुर के पर्यटन विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जबकि मैनपाट और जशपुर में पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर है। धार्मिक पर्यटन के तहत भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए भारत सरकार से 145 करोड़ 99 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है। रतनपुर के महामाया मंदिर क्षेत्र सहित अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के प्रस्ताव भी आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत आईआरसीटीसी की सहायता से अब तक 61 ट्रेनों का संचालन किया जा चुका है और 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या और काशी की यात्रा कर चुके हैं।

फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में फिल्म सिटी निर्माण के लिए 203 करोड़ 53 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। कन्वेंशन सेंटर और फिल्म सिटी के विकास की अनुमानित लागत लगभग 350 करोड़ रुपये है। इससे होटल, परिवहन, कैटरिंग, तकनीकी सेवाओं, सेट निर्माण और डिजिटल कंटेंट सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने की संभावना है।

पर्यटन सेवाओं को डिजिटल स्वरूप भी दिया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से लगभग 6 करोड़ 48 लाख रुपये और पर्यटन इकाइयों से लगभग 31 करोड़ 75 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। प्रदेश में 390 से अधिक टूर ऑपरेटरों और ट्रैवल एजेंटों तथा 26 होटलों का पंजीकरण हो चुका है। विभिन्न पर्यटन गतिविधियों का प्रशिक्षण देकर 500 स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य है।

सरकार लोककला और संस्कृति को भी पर्यटन से जोड़ रही है। 'रंगतरंग', 'पावस प्रसंग', 'रंगपरव' और 'लोकरंग पर्व' जैसे आयोजनों के माध्यम से लोक एवं शास्त्रीय कलाओं को मंच दिया जा रहा है। पिछले ढाई सालों में 70 कलाकारों को लगभग 30 लाख 3 हजार रुपये की चिकित्सा सहायता, मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के तहत 87 कलाकारों को लगभग 19 लाख 8 हजार रुपये तथा 407 आर्थिक रूप से अभावग्रस्त वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को लगभग 82 लाख 12 हजार रुपये की पेंशन दी जा चुकी है।

प्रदेश में 63 राज्य संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है और 12 राज्य संरक्षित स्मारकों में संरक्षण, उन्नयन तथा पर्यटक सुविधाओं के विकास की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय के उन्नयन तथा पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो की भी तैयारी है।

सरकार ने वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान देश-दुनिया में स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत अगले पांच सालों में हर वर्ष 100 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में सतत विकास, समुदाय आधारित पर्यटन, निजी निवेश और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल से विकसित करने की योजना है। इससे लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

सरकार का प्रयास है कि पर्यटन से होने वाला आर्थिक लाभ गांवों, महिलाओं, युवाओं, कलाकारों और स्थानीय परिवारों तक पहुंचे तथा प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन राज्य की आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण आधार बने।

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