रायपुर , अक्टूबर 19 -- छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के ग्राम घुटरा निवासी एक मजदूर के नाम 'राष्ट्रपति' को लेकर उठे विवाद के बीच संवैधानिक पदों और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े शब्दों के व्यक्तिगत नाम के रूप में इस्तेमाल पर स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाने की मांग की गई है। इस संबंध में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा की ओर से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी गई याचिकाओं पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई है, जिसकी जानकारी आज मिश्रा ने दी ।
उन्होंने बताया कि, राष्ट्रपति सचिवालय ने 17 सितंबर 2026 को संबंधित याचिका को आगे की कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के गृह सचिव और विधि एवं न्याय विभाग के संयुक्त सचिव के पास भेजा है। याचिका आठ अगस्त 2026 को राष्ट्रपति को भेजी गई थी। सचिवालय के पत्र में संबंधित अधिकारियों से मामले पर ध्यान देने और याचिका पर हुई कार्रवाई की जानकारी सीधे याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने को कहा गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय में भी इस मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
ग्राम घुटरा निवासी राष्ट्रपति पेशे से मजदूर हैं और मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। गांव में लोग उन्हें आमतौर पर 'राजपति' कहकर बुलाते हैं, लेकिन उनकी स्कूल की मार्कशीट और बैंक पासबुक सहित अन्य दस्तावेजों में नाम 'राष्ट्रपति' ही दर्ज है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्राथमिक स्कूल घुटरा के दाखिला रजिस्टर में 14 जुलाई 1988 को भी उनका नाम राष्ट्रपति के रूप में दर्ज किया गया था। राष्ट्रपति ने बताया कि उनका यह नाम माता-पिता ने रखा था। उन्होंने कहा कि पेशे से मजदूर होने के कारण वह मजदूरी करके परिवार चलाते हैं और गांव में लोग उन्हें राजपति के नाम से पुकारते हैं, जबकि मार्कशीट में उनका नाम राष्ट्रपति ही लिखा है।
इस मामले को लेकर सौरव मिश्रा ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को अलग-अलग पत्र लिखकर संवैधानिक पदों तथा राष्ट्रीय पहचान से जुड़े शब्दों के व्यक्तिगत नाम के रूप में इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है। उन्होंने अपनी याचिका में 'राष्ट्रपति', 'प्रधानमंत्री', 'मुख्यमंत्री', 'राज्यपाल' और 'भारत' जैसे शब्दों को लोगों के नाम के रूप में रखने के संबंध में स्पष्ट नियम बनाने की मांग की है।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार से इस विषय पर मौजूदा कानूनों की समीक्षा करने और आवश्यकता पड़ने पर नए कानूनी प्रावधान तैयार करने का आग्रह किया है। उन्होंने इस उद्देश्य से कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लेने और विधेयक तैयार करने का सुझाव भी दिया है।
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