बलरामपुर , अक्टूबर 29 -- छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्कूली विद्यार्थियों को दुष्कर्म के मामलों में दोषी आसाराम से संबंधित पुस्तकें वितरित किए जाने के मामले में शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए स्वामी आत्मानंद स्कूल के प्राचार्य महेश प्रजापति को पद से हटा दिया है। अभिभावकों की शिकायत पर कराई गई जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने बुधवार को यह कार्रवाई की, जिसकी जानकारी गुरुवार को दी गयी । प्राचार्य को संयुक्त जिला कार्यालय की शिक्षा शाखा में संलग्न किया गया है।

मामला जिले के रघुनाथनगर स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल का है, जहां 26 अक्टूबर को आसाराम के अनुयायियों ने पहुंचकर कक्षा छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को 'संस्कार सरिता' नामक पुस्तक का वितरण कराया था। आरोप है कि प्राचार्य प्रजापति के माध्यम से बच्चों को पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं और उन्हें पढ़कर आने के निर्देश दिए गए। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि पुस्तक की सामग्री के आधार पर उनकी परीक्षा आयोजित की जाएगी।

पुस्तक वितरण और परीक्षा संबंधी जानकारी अभिभावकों तक पहुंचने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। अभिभावकों ने इस गतिविधि पर कड़ी आपत्ति जताते हुए शिक्षा विभाग से शिकायत की। उनका आरोप था कि बच्चों पर आसाराम से संबंधित पुस्तक पढ़ने और परीक्षा में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है।

अभिभावकों ने सवाल उठाया कि दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए और जेल में बंद आसाराम से संबंधित साहित्य का विद्यालय में वितरण किस आधार पर किया गया। उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि एक विवादित व्यक्ति को महापुरुष के रूप में प्रस्तुत करने वाली सामग्री बच्चों को क्यों उपलब्ध कराई जा रही है।

बताया गया है कि 'संस्कार सरिता' पुस्तक में आसाराम की तस्वीरों के साथ उसके कथन भी प्रकाशित हैं। अभिभावकों ने इसे विद्यार्थियों के लिए अनुचित बताते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार प्राचार्य के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने मामले की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद वाड्रफनगर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) श्याम किशोर जायसवाल जांच के लिए विद्यालय पहुंचे। उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों के बयान दर्ज कर पुस्तक वितरण से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटाई।

जांच के दौरान विद्यार्थियों ने अपने बयानों में पुष्टि की कि विद्यालय के प्राचार्य प्रजापति ने ही उन्हें 'संस्कार सरिता' पुस्तकें वितरित की थीं। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने 28 अक्टूबर को प्रजापति को प्राचार्य पद से हटाने का आदेश जारी किया।

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