रायपुर , अगस्त 02 -- छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षक (एलबी) संवर्ग के पेंशन एवं अन्य सेवा लाभों की गणना को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग पर अपना निर्णय स्पष्ट कर दिया है।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि शिक्षक (एलबी) संवर्ग के सभी सेवा लाभों की गणना एक जुलाई 2018 से ही की जाएगी तथा इससे पूर्व शिक्षाकर्मी के रूप में की गई सेवा अवधि को शासकीय सेवा के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी।

प्रदेश में पंचायत एवं नगरीय निकायों के अधीन शिक्षाकर्मी के रूप में कार्यरत शिक्षकों का एक जुलाई 2018 को स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया था। इसके बाद से शिक्षक संगठन यह मांग कर रहे थे कि पेंशन तथा अन्य सेवा लाभों के लिए उनकी सेवा अवधि की गणना शिक्षाकर्मी के रूप में पहली नियुक्ति की तिथि से की जाए।

स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि शिक्षक (एलबी) संवर्ग के सेवा संबंधी सभी लाभों का आधार एक जुलाई 2018 ही रहेगा। विभाग के अनुसार, संविलियन से पूर्व संबंधित शिक्षक पंचायत एवं नगरीय निकायों के अधीन कार्यरत थे और उस अवधि को राज्य शासन की शासकीय सेवा नहीं माना जा सकता। इसी कारण पहली नियुक्ति की तिथि से सेवा जोड़कर पेंशन अथवा अन्य लाभ प्रदान किए जाने का प्रावधान स्वीकार्य नहीं है।

सरकार के निर्णय के अनुसार यदि किसी शिक्षक की शिक्षाकर्मी के रूप में नियुक्ति वर्ष 2008 में हुई और उसका संविलियन एक जुलाई 2018 को हुआ, तथा वह वर्ष 2038 में सेवानिवृत्त होता है, तो उसकी पेंशन योग्य सेवा की गणना वर्ष 2008 से नहीं बल्कि एक जुलाई 2018 से की जाएगी। इसी प्रकार वर्ष 2007 और 2010 में नियुक्त दो शिक्षकों का संविलियन यदि एक ही तिथि 1 जुलाई 2018 को हुआ है, तो दोनों की शासकीय सेवा की शुरुआत भी इसी तिथि से मानी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे पर दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान 23 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को मामले के संवैधानिक और मानवीय पक्षों पर विचार करते हुए उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने अपना आदेश जारी कर शिक्षकों की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

सरकार ने अपने आदेश में तर्क दिया है कि संविलियन से पूर्व शिक्षक राज्य शासन के प्रत्यक्ष कर्मचारी नहीं थे, बल्कि पंचायत एवं नगरीय निकायों के अधीन कार्यरत थे। इसलिए उस अवधि को शासकीय सेवा मानते हुए पेंशन एवं अन्य सेवा लाभों की गणना नहीं की जा सकती।

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