अंबिकापुर , फरवरी 25 -- छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में अंबिकापुर शहर के नमनाकला खटिकपारा में 13 साल के एक बच्चे की दूषित पानी पीने से पीलिया होने के कारण मौत हो गयी है। नगर निगम अंबिकापुर के रहवास इलाके में पीलिया से यह दूसरी मौत है।

महापौर मंजूषा भगत ने मंगलवार को पीलिया प्रभावित इलाकों का दौरा कर पानी का सैंपल लेने में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने पीलिया संबंधी आधिकारिक रिपोर्ट नहीं मिलने का दावा फिर से दोहराया। सुश्री भगत ने अपने स्तर पर पानी के नमूने जांच के लिए भेजे हैं, जिसकी रिपोर्ट उन्हें बुधवार को मिलने की संभावना है।

नगर निगम के मीडिया प्रभारी से मिली जानकारी के अनुसार, सुश्री भगत ने पीलिया प्रभावित वार्डों का दौरा किया। उन्होंने केवल दो घरों में 'मल युक्त पानी' की सप्लाई होने के तथ्य को स्वीकार किया और फिर से पानी के नमूने लेकर जांच करवाने की बात कही।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 22 फरवरी को झंझटपारा नवापारा में एक 40 वर्षीय व्यक्ति की भी पीलिया से मौत हो गयी थी। नवागढ़, घुटरापारा सहित कई वार्डों में पीलिया के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में नमूनों की जांच तो तेज कर दी है, लेकिन नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र नवागढ़ की टीम ने 14 फरवरी को मोमिनपुरा क्षेत्र के विभिन्न घरों से पेयजल के नमूने एकत्र किए थे। यह कार्रवाई उस क्षेत्र में पीलिया के संदिग्ध मरीजों की लगातार मिल रही सूचनाओं के बाद की गयी थी। इन नमूनों को जांच के लिए राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर के माइक्रोबायोलॉजी विभाग भेजा गया था। इसके बाद 16 फरवरी को मिली लैब रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि क्षेत्र के कई नलों का पानी उपभोग के लिए अयोग्य है। पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पायी गयी। यह मलजल मिलने का संकेत है। कुछ उपभोक्ताओं के यहां से लिये गये नमूनों में एमपीएन काउंट 7-28 प्रति 100 मिलीलीटर के बीच पाया गया, जिसे 'अस्वीकार्य' श्रेणी में रखा गया है। रिपोर्ट में बैक्टीरियल लोड की पुष्टि करते हुए तुरंत कीटाणुशोधन और शुद्धिकरण के उपाय अपनाने की सलाह दी गयी थी।

इस रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) पी.एस. मार्को ने 17 फरवरी को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के कार्यपालन अभियंता को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिये थे। पत्र में मल युक्त पानी के सप्लाई की बात स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हुए संबंधित विभाग से जांच कर उचित कार्रवाई करने को कहा गया था। सीएमएचओ कार्यालय ने इस पत्र की प्रतिलिपियां कलेक्टर सरगुजा, आयुक्त नगर निगम अंबिकापुर, राज्य सर्विलेंस अधिकारी रायपुर, जिला सर्विलेंस अधिकारी तथा शहरी कार्यक्रम प्रबंधक को भी भेजी थीं।

सीएमएचओ पी.एस. मार्को ने पुष्टि की है कि मोमिनपुरा एवं नवागढ़ इलाके में 40 से अधिक पीलिया मरीजों का उपचार जारी है, जिनमें से कुछ गंभीर श्रेणी के हैं और उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि 17 फरवरी को ही सभी संबंधित अधिकारियों को भेजी गयी इस गंभीर रिपोर्ट के बारे में महापौर सुश्री भगत को 24 फरवरी तक कोई जानकारी नहीं थी।

महापौर ने यूनीवार्ता से बातचीत में कहा, "मल युक्त पानी की रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। मेरी अभी अधिकारियों से बात हुई है, उन्होंने ऐसी किसी रिपोर्ट के बारे में मुझे सूचित नहीं किया है।" महापौर ने मंगलवार को दौरे के दौरान भी केवल दो घरों में दूषित पानी मिलने की बात स्वीकार करते हुए नये सिरे से नमूने लेने की बात कही, जबकि शासकीय लैब रिपोर्ट पहले से ही मौजूद है।

नगर निगम की इस कार्यप्रणाली पर विपक्ष ने जमकर निशाना साधा है। जिला कांग्रेस समिति ने बुधवार को नये नगर निगम भवन कार्यालय के घेराव का ऐलान किया है। पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने मामले पर गहरी चिंता जताई है। वह मोमिनपुरा इलाके के पूर्व पार्षद भी रह चुके हैं।

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