भोपाल , सितंबर 26 -- मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने शनिवार को सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 24 मासूमों की मौत के बावजूद जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। उन्होंने विभागीय जांच के लंबित रहने के दौरान तत्कालीन औषधि निरीक्षक गौरव शर्मा की बहाली और गुना में पदस्थापना को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है।

श्री पटवारी ने कहा कि छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र में सर्दी-खांसी के इलाज के लिए बच्चों को दिए गए 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप के बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ी और गंभीर किडनी क्षति तथा बहु-अंग विफलता के मामले सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार मृत बच्चों में बड़ी संख्या पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की थी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में 'कोल्ड्रिफ' के नमूनों में डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 48.6 प्रतिशत पाए जाने का उल्लेख है, जबकि निर्धारित सीमा 0.1 प्रतिशत बताई गई है। उनका कहना था कि इतनी अधिक मात्रा में विषाक्त पदार्थ पाए जाने से दवा की गुणवत्ता जांच और बाजार में उसकी निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।

श्री पटवारी ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार परासिया क्षेत्र में सिरप की बिक्री लंबे समय तक होती रही, लेकिन संबंधित क्षेत्रीय औषधि निरीक्षक ने इसका वैधानिक नमूना परीक्षण के लिए राज्य प्रयोगशाला नहीं भेजा। उन्होंने पूछा कि दवा की बिक्री के दौरान निगरानी तंत्र की भूमिका क्या रही और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने गत 23 सितंबर के प्रशासनिक आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन छिंदवाड़ा औषधि निरीक्षक गौरव शर्मा को अक्टूबर 2025 में निलंबित किया गया था। बाद में उनके खिलाफ आरोप-पत्र जारी हुआ और जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर फरवरी 2026 में विभागीय जांच शुरू की गई। इसके बावजूद जांच पूरी होने से पहले उन्हें निलंबन से बहाल कर गुना जिले में पदस्थ कर दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि विभागीय जांच लंबित रहने के बावजूद बहाली का फैसला किस आधार पर लिया गया और क्या इस संबंध में सरकार ने कोई स्पष्ट कारण दर्ज किया है।

श्री पटवारी ने कहा कि घटना के बाद छिंदवाड़ा और जबलपुर के औषधि निरीक्षकों को निलंबित करने, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के उप संचालक को निलंबित करने और तत्कालीन ड्रग कंट्रोलर को हटाकर स्थानांतरित करने जैसी कार्रवाई की गई थी। एसआईटी भी गठित की गई थी। उन्होंने सरकार से इन कार्रवाइयों की वर्तमान स्थिति और विभागीय जांच के परिणाम सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप के कथित अवैध नेटवर्क का मुद्दा उठाते हुए कहा कि रिपोर्ट में इसके 12 राज्यों तक फैले होने, 350 से अधिक फर्जी फर्मों के जरिए 20 लाख से अधिक बोतलों को अवैध बाजार में पहुंचाने तथा एक आरोपी की 9.5 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क किए जाने का उल्लेख है।

श्री पटवारी ने कहा कि सागर, सतना, महाकौशल, विंध्य, इंदौर और उज्जैन सहित कई क्षेत्रों में कफ सिरप की बरामदगी और अवैध बिक्री का उल्लेख सामने आया है। सागर में 72 हजार बोतलों की बरामदगी का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 55 जिलों में स्वीकृत औषधि निरीक्षक पदों में आधे से अधिक रिक्त हैं और कई अधिकारियों को एक से अधिक जिलों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। भोपाल की केंद्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में आधुनिक उपकरणों और योग्य विश्लेषकों की कमी का भी उल्लेख किया गया है।

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