चेन्नई , अगस्त 31 -- तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को राज्य विधानसभा को सूचित किया कि तंजावुर जिले स्थित तमिल विश्वविद्यालय परिसर में बनने वाले 'चोल संग्रहालय' की योजना को रद्द नहीं किया जायेगा। इसके साथ ही सरकार ने इस परियोजना के भविष्य को लेकर उठ रहीं सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है।
स्कूल शिक्षा और तमिल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने सदन में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए स्पष्ट किया कि पिछली द्रमुक सरकार के दौरान घोषित इस संग्रहालय परियोजना को बंद करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है।
इस प्रस्तावित संग्रहालय का उद्देश्य चोल राजवंश के इतिहास, उपलब्धियों और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करना है। तंजावुर के तमिल विश्वविद्यालय परिसर में लगभग 50 से 52 एकड़ भूमि पर विकसित हो रही इस परियोजना की अनुमानित लागत 56.41 करोड़ रुपये है। इसे एक प्रमुख विरासत और पर्यटन पहल के रूप में तैयार किया जा रहा है।
चोल शासकों की उपलब्धियों और उनके वैश्विक प्रभाव का उल्लेख करने के लिए तमिलनाडु के 2023 के बजट में मूल रूप से इस परियोजना की घोषणा की गयी थी। इस वर्ष की शुरुआत में संग्रहालय परिसर में राजा राज चोल की एक विशाल प्रतिमा स्थापित करने की योजना सामने आने के बाद यह प्रस्ताव और अधिक महत्वपूर्ण हो गया। विश्वविद्यालय परिसर में ही संग्रहालय का शिलान्यास भी प्रस्तावित था।
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