कोलकाता , अक्टूबर 31 -- पश्चिम बंगाल की राजधानी स्थित बैंकशाल अदालत ने शनिवार को चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के सिलसिले में गिरफ्तार सभी नौ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इस दुखद हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई थी।

अदालत ने गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों को 13 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि एक अन्य आरोपी की न्यायिक हिरासत छह नवंबर तक बढ़ाई गई है। इन सभी को सुरक्षा व्यवस्था में चूक, भीड़ नियंत्रण में विफलता और कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही के आरोपों के तहत 17 अक्टूबर की त्रासदी के बाद गिरफ्तार किया गया था।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि पूजा समिति ने भीड़ प्रबंधन के लिए एक निजी सुरक्षा एजेंसी के साथ पांच लाख रुपये का अनुबंध किया था, जिसके दस्तावेज जांचकर्ताओं के पास मौजूद हैं। इसके अलावा, पंडाल में की गई घोषणाओं से श्रद्धालुओं के बीच दहशत फैलने और एक साथ बाहर निकलने की होड़ मचने से स्थिति बिगड़ने का आरोप भी लगा है।

दूसरी ओर, आरोपियों के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया है कि केवल उनके मुवक्किलों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने इस त्रासदी में पूजा से जुड़े कलाकारों और पुलिस की भूमिका की भी जांच करने की मांग की।

इस बीच, घटना की जांच कर रही विशेष जांच समिति ने पूरे मामले का क्रम जानने के लिए उप पुलिस आयुक्त (मध्य) प्रवीण प्रकाश और उप पुलिस आयुक्त (पूर्व) अरिंदम सरकार सहित 16 लोगों को राइटर्स बिल्डिंग्स में तलब किया गया है। समिति इस बात की गहन जांच कर रही है कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई और भीड़ प्रबंधन के लिए कौन जिम्मेदार है।

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