तिरुवनंतपुरम , सितंबर 28 -- केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने लोकायुक्त के साथ हाल ही में हुई बैठक पर विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन की आलोचना को खारिज करते हुए आरोपों को भ्रामक और तथ्यों के विपरीत बताया है।

श्री चेन्निथला ने कहा कि 23 सितंबर की बैठक लोकायुक्त के अनुरोध पर बुलायी गयी थी, ताकि अत्यावश्यक प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की जा सके और इसके कामकाज को प्रभावित करने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके। इसका उद्देश्य इस वैधानिक संस्था के स्वतंत्र कामकाज में हस्तक्षेप करना या उसे प्रभावित करना बिल्कुल नहीं था।

उन्होंने कहा, "यह बैठक लोकायुक्त द्वारा कुछ जरूरी प्रशासनिक मामलों में सरकार से हस्तक्षेप करने और उसके कामकाज में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए आधिकारिक रूप से अनुरोध किए जाने के बाद हुई थी।"श्री विजयन ने आरोप लगाया था कि इस बैठक का मकसद लोकायुक्त को सरकार के नियंत्रण में लाना और इसकी स्वायत्तता को कमजोर करना था।

आरोप को सिरे से खारिज करते हुए श्री चेन्निथला ने कहा कि अतीत में भी सरकार और लोकायुक्त के बीच ऐसी बैठकें होती रही हैं।

उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन के नेतृत्व में एक अगस्त 2006 को हुई एक बैठक का हवाला दिया, जिसमें तत्कालीन लोकायुक्त न्यायमूर्ति के श्रीधरन, उप-लोकायुक्त न्यायमूर्ति एन कृष्णन नायर तथा न्यायमूर्ति केए मोहम्मद शफी, तत्कालीन गृह मंत्री कोदियेरी बालकृष्णन और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे।

उन्होंने विजयन का जिक्र करते हुए कहा, "उस समय आप शक्तिशाली पार्टी सचिव थे और तत्कालीन गृह मंत्री आपके भरोसेमंद सहयोगी थे।"उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी की उपस्थिति में 27 जुलाई 2014 को हुई एक बैठक का भी उदाहरण दिया, जिसमें लोकायुक्त न्यायमूर्ति पायस सी कुरियाकोस, उप-लोकायुक्त, गृह सचिव और विधि सचिव शामिल हुए थे।

उन्होंने सवाल किया, "क्या उस समय लोकायुक्त की स्वतंत्रता को कमजोर करने की किसी कोशिश की जानकारी आपको दी गयी थी?"श्री चेन्निथला ने बताया कि ताजा बैठक लोकायुक्त के अनुरोध के बाद हुई थी, जिसमें लोकायुक्त न्यायमूर्ति अनिल कुमार, उप-लोकायुक्त न्यायमूर्ति अशोक मेनन व न्यायमूर्ति शेर्सी, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) मिन्हाज आलम, अभियोजन महानिदेशक टी. आसिफ अली, विधि सचिव पीएन विनोद, वित्त अतिरिक्त सचिव एम गीता, सतर्कता अतिरिक्त सचिव जोस कलाथिंगल और लोकायुक्त रजिस्ट्रार ई बैजू उपस्थित रहे।

उन्होंने कहा कि सरकार और वैधानिक संस्थानों के बीच प्रशासनिक समन्वय बैठकें सामान्य प्रक्रिया हैं। उन्होंने उन बैठकों का भी उल्लेख किया, जो श्री विजयन ने मुख्यमंत्री रहते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के साथ की थीं।

श्री चेन्निथला ने आरोप लगाया कि लोकायुक्त से जुड़े कई प्रशासनिक मामले लगभग 10 वर्षों से लंबित पड़े थे और पिछली सरकार संस्था की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रही थी।

उन्होंने लोकायुक्त के अधिकारों में कटौती करने वाले संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संशोधन तब लाया गया था, जब पूर्व मंत्री केटी जलील के अधिकारों के दुरुपयोग सहित कई आरोप इस संस्था के सामने आये थे।

उन्होंने कहा, "शायद उन घटनाक्रमों की यादें ही विपक्ष के नेता को अब लोकायुक्त को कमजोर करने के प्रयास का आरोप लगाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।"श्री चेन्निथला के अनुसार, लोकायुक्त ने 23 सितंबर की बैठक में कई मुद्दे उठाये थे, जिनमें केरलम लोकायुक्त अधिनियम, 1999 की धारा 7(3) के तहत जांच के लिए सरकारी अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों और याचिकाओं को लोकायुक्त को भेजना शामिल था।

उन्होंने बताया कि लोकायुक्त ने अवमानना नियमों की तैयारी में तेजी लाने, अपने विशेष अटॉर्नी कार्यालय के लिए सुविधाओं और अपनी जांच शाखा से जुड़े पुलिसकर्मियों के लिए वाहनों की खरीद की भी मांग की। अन्य अनुरोधों में जांच शाखा के पुलिसकर्मियों के लिए वर्दी भत्ता मंजूर करना, लोकायुक्त कर्मचारियों की सेवा शर्तों को नियंत्रित करने वाले विशेष नियमों की अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाना और केरल लोकायुक्त (संपत्ति विवरण दाखिल करना) संशोधन नियम, 2024 की अधिसूचना जारी करना शामिल था।

उन्होंने कहा कि यात्रा भत्ते की सीमा में ढील देना और लोकायुक्त के कामकाज का डिजिटलीकरण करना भी बैठक में उठाये गये अन्य मामलों में शामिल थे।

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