चेन्नई , अक्टूबर 04 -- जेम ग्रेनाइट्स के विवादित कारोबारी आर. वीरमणि से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच कर रही चेन्नई की केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) पुलिस ने उसके खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत एक और मामला दर्ज किया है।

यह उसके खिलाफ दर्ज पांचवां मामला है। नाबालिग किशोरियों के साथ वर्षों तक यौन उत्पीड़न करने के आरोप में वीरमणि को उसके परिचित एक दंपति के साथ गिरफ्तार किया गया था और न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उसके खिलाफ लगातार शिकायतें मिलने के बाद तीनों को गुंडा अधिनियम के तहत भी हिरासत में लिया गया। बाद में उसके एक पूर्व कर्मचारी को भी गिरफ्तार किया गया।

पांचवां मामला चेन्नई की एक महिला की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। महिला ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी का वीरमणि ने यौन शोषण किया था।

इस बीच, सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के विधि प्रकोष्ठ ने सीसीबी और विशेष जांच दल (एसआईटी) को याचिका देकर उद्योगपति को बचाने और मामले को दबाने के लिए पूर्ववर्ती द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार के कार्यकाल में किए गये कथित प्रयासों की विस्तृत जांच की मांग की है।

याचिका में कहा गया है कि जांच में पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, पूर्व कानून मंत्री एस. रेगुपति और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका और उनके रुख को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसमें सीसीबी से यह पता लगाने की मांग की गयी है कि अक्टूबर 2025 में दर्ज पहली शिकायत तत्कालीन गृह विभाग का कार्यभार संभाल रहे श्री स्टालिन तक पहुंची थी या नहीं और क्या उन्होंने इस संबंध में कोई निर्देश दिए थे।

याचिका में सवाल उठाया गया कि पूर्व कानून मंत्री ने पहले मामले की शिकायत के साथ पेश किए गये वीडियो साक्ष्य की गुणवत्ता पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी कैसे की।

दूसरा मामला 2024 में एक किशोरी के कथित यौन उत्पीड़न की शिकायत के बाद दर्ज किया गया था। इसके बाद तीसरा मामला यौन उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में दर्ज किया गया। पीड़िता की मां ने शिकायत में कहा था कि 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली उनकी पुत्री ने 2004 में वीरमणि द्वारा कथित यौन उत्पीड़न के बाद आत्महत्या कर ली थी।

चौथा मामला 30 सितंबर को एक अन्य नाबालिग किशोरी के यौन शोषण के आरोप में दर्ज किया गया था।

यह मामला पिछले साल अक्टूबर में ही सामने आया था, जब पिछली द्रमुक सरकार के कार्यकाल में बाल अधिकार कार्यकर्ता समूह के एक सदस्य ने एक वीडियो सौंपा था। वीडियो में 80 वर्ष से अधिक उम्र के कारोबारी को एक नाबालिग किशोरी के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार करते हुए देखा गया था। प्राथमिकी दर्ज करने के बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि पुलिस पीड़िता की पहचान नहीं कर पायी। इसके बाद पुलिस ने पॉक्सो अदालत में मामले को बंद करने की रिपोर्ट भी दाखिल कर दी। हालांकि, न्यायाधीश ने रिपोर्ट खारिज करते हुए मामले में आगे की जांच के निर्देश दिये।

पॉक्सो अदालत के आदेश के आधार पर मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार ने मामले की नये सिरे से जांच शुरू कराई। मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया था कि मामले में जो भी व्यक्ति शामिल पाया जाए, वह कोई भी हो, उसे बख्शा न जाए। इसके बाद जांच में कथित रूप से यौन शोषण की शिकार हुईं और महिलाओं की पहचान हुई तथा नए साक्ष्य सामने आए।

अदालत की मौजूदगी में पीड़ितों के बयान दर्ज करने के बाद सीसीबी पुलिस ने वीरमणि, उसकी परिचित शांति और उसके पति महेंद्र सिम्हन को गिरफ्तार किया। जेम ग्रेनाइट्स के कारोबारी के करीबी सहयोगी और पूर्व कर्मचारी गणेशन को सबसे बाद में गिरफ्तार किया गया। पुलिस को उसके मोबाइल फोन में वीरमणि के कथित अश्लील कृत्यों से संबंधित वीडियो और अन्य सामग्री मिली थी, जिसे उसने जांच अधिकारियों से छिपाया था।

जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस मामले में और कितने लोग शामिल थे और क्या कथित अपराध लंबे समय तक जारी रहे थे। इसके लिए गिरफ्तार दंपति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

जांच में उद्योगपति को बचाने के लिए कथित तौर पर 50 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी रकम के लेन-देन का भी पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा, जांच में उन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, जिन्होंने पहले दर्ज शिकायत को संभाला था।

एक प्रमुख एसआरएमयू के बेटे प्रकाश के बारे में कहा गया है कि उसने कथित तौर पर वित्तीय लेन-देन के समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। सीसीबी पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए समन जारी किया है, लेकिन बताया गया है कि वह विदेश में रह रहा है। सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए तीन प्रमुख पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया है।

जब पहली शिकायत दर्ज की गयी थी, उस समय चेन्नई पुलिस आयुक्त के पद पर रहे और वर्तमान में तमिलनाडु पुलिस अकादमी के निदेशक एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) ए. अरुण तथा तत्कालीन चेन्नई शहर के संयुक्त पुलिस आयुक्त और वर्तमान में कोयंबटूर शहर के पुलिस आयुक्त एन. कन्नन को अनिवार्य प्रतीक्षा पर रखा गया है। वहीं, पहली जांच अधिकारी रहीं चेन्नई शहर की सहायक पुलिस आयुक्त एम.ए. यास्मीन को रिक्ति रिजर्व में रखा गया है।

इस बीच, राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय सभी महिला अधिकारियों वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की। बाद में टीम में सात और अधिकारियों को शामिल कर इसका विस्तार किया गया।

मद्रास उच्च न्यायालय में भी एक याचिका दायर कर मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने का निर्देश देने की मांग की गई। हालांकि, अदालत ने यह मांग खारिज कर दी और कहा कि नई गठित एसआईटी को मामले की जांच के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए।

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