चेन्नई , मार्च 26 -- तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में एक साधारण खून जांच के माध्यम से अल्जाइमर के शुरुआती लक्षणों को पता लगाने वाली एक तकनीक का शुभारंभ किया गया है। 'मिस्पा आई60' नामक यह जांच न केवल आसान है बल्कि काफी सस्ती भी है।
न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स में शुरू की गई यह सुविधा डॉक्टरों को बीमारी के सटीक आकलन में मदद करेगी, हालांकि यह पूरी तरह से पुरानी जांच प्रणालियों जैसे 'न्यूरोइमेजिंग' का विकल्प नहीं है।
यह नई तकनीक शरीर में मौजूद 'पी-ताऊ' और 'अमाइलॉइड' प्रोटीन की पहचान करती है। ये प्रोटीन अल्जाइमर से सीधे जुड़े होते हैं और इनकी मदद से याददाश्त कमजोर होने से काफी पहले ही बीमारी के लक्षणों को पकड़ा जा सकता है। इससे समय पर इलाज शुरू करने और अल्जाइमर को डिमेंशिया (मनोभ्रंश) की अन्य समान बीमारियों से अलग पहचानने में आसानी होगी।
न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स की लैब प्रमुख डॉ. अस्मा बीबी ने बताया कि अल्जाइमर के लक्षण अक्सर दूसरी मानसिक बीमारियों जैसे ही होते हैं, जिससे सटीक पहचान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह नयी खून जांच मरीजों को सही समय पर सही इलाज दिलाने में निर्णायक साबित होगी।
न्यूबर्ग के ओएमआर सेंटर पर किए गए परीक्षणों में 45 प्रतिशत मरीजों में पी- ताऊ-अमाइलॉइड का स्तर बढ़ा हुआ मिला, जो अल्जाइमर की शुरुआती संभावना को दर्शाता है। विशेषज्ञों और न्यूरोलॉजिस्टों ने भी इस जांच के परिणामों को काफी सटीक पाया है।
दुनिया भर में अल्जाइमर के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसकी समय पर पहचान बेहद जरूरी है। इस तरह के नए प्रयोगों से अब तमिलनाडु के शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी लोगों को बेहतर और सटीक इलाज मिल सकेगा।
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