चेन्नई , जून 03 -- भाप से चलने वाली उपनगरीय ट्रेनों से लेकर समकालीन इलेक्ट्रिक सेवाओं तक, इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट (ईएमयू) ट्रेनों के प्रथम श्रेणी कोचों में यात्रा करना चेन्नई की उपनगरीय रेलवे विरासत का स्थायी प्रतीक बना हुआ है। इस नेटवर्क की यह शुरुआती वर्षों से ही अभिन्न विशेषता रही है, जो शहर की रेलवे विरासत के एक अनूठे पहलू को दर्शाती है।
जैसे-जैसे उपनगरीय नेटवर्क इलेक्ट्रिक परिचालन के 100 वर्ष पूरे करने के करीब पहुंच रहा है, प्रथम श्रेणी कोच शहर के रेलवे के अतीत और वर्तमान के बीच एक जीवंत कड़ी के रूप में खड़े हैं। यह एक ऐसी परंपरा को दर्शाते हैं, जिसने यात्रियों की कई पीढ़ियों की सेवा की है।
यह आज भी लगभग एक सदी पुरानी विरासत को जारी रखे हुए है। चूंकि चेन्नई का उपनगरीय रेलवे नेटवर्क 2031 में इलेक्ट्रिक ट्रेन परिचालन के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ रहा है, इसकी सबसे पुरानी परंपराओं में से एक प्रथम श्रेणी कोच हर दिन यात्रियों की सेवा कर रही है।
दक्षिणी रेलवे के अधिकारियों ने कहा कि हालांकि चेन्नई की उपनगरीय ट्रेनें लाखों यात्रियों को किफायती और कुशल परिवहन प्रदान करने के लिए व्यापक रूप से जानी जाती हैं, लेकिन फर्स्ट क्लास की सुविधा इसके शुरुआती वर्षों से ही नेटवर्क की एक अभिन्न विशेषता रही है, जो शहर की रेलवे विरासत के अनूठे पहलू को दर्शाती है। मद्रास (अब चेन्नई) में उपनगरीय रेलवे सेवाओं का विकास 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत के दौरान शुरू हुआ था।
उस दौर की रेलवे परम्पराओं के अनुरूप, यात्रियों की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ट्रेनों में यात्रा की विभिन्न श्रेणियां उपलब्ध थीं। बेहतर यात्रा अनुभव चाहने वाले यात्रियों को अधिक आराम, गोपनीयता और सुविधा प्रदान करने के लिए प्रथम श्रेणी की सुविधा शुरू की गयी थी। दिनांक 11 मई, 1931 को मद्रास बीच और ताम्बरम के बीच इलेक्ट्रिक उपनगरीय सेवाओं की शुरुआत के बाद भी इस यात्रा का महत्व बना रहा, जो भारत की सबसे शुरुआती उपनगरीय रेलवे विद्युतीकरण परियोजनाओं में से एक थी।विशेष रूप से समर्पित प्रथम श्रेणी कोच नयी शुरू की गयी ईएमयू सेवाओं का हिस्सा थे और तब से चेन्नई की उपनगरीय ट्रेनों की एक विशेषता बने हुए हैं।
ऐतिहासिक रूप से, प्रथम श्रेणी की यात्रा के लिए विशेष रूप से जारी किये गये टिकट और सीजन पास दिये जाते थे। मजबूत कार्ड स्टॉक पर छपे ये टिकट अक्सर क्रीम, बादामी या हल्के भूरे रंग के होते थे और इन पर रूट का विवरण, वैधता अवधि, सीरियल नंबर और श्रेणी के निशान होते थे। मासिक और त्रैमासिक सीजन टिकटों ने नियमित यात्रियों को आराम से यात्रा करने में सक्षम बनाया, साथ ही 20वीं सदी के दौरान पूरे शहर में उभर रही उपनगरीय यात्री संस्कृति को भी बढ़ावा दिया।
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