अगरतला , मार्च 29 -- त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) में सत्तारूढ़ टिपरा मोथा पार्टी के भीतर आंतरिक कलह आगामी 12 अप्रैल को होने वाले एडीसी चुनाव से पहले और तेज हो गई है। पार्टी के दो विधायकों पर भाजपा नेताओं और उम्मीदवारों से मुलाकात के आरोपों के बाद विवाद गहरा गया है।

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई है, जिसमें राज्य के वन मंत्री एवं टिपरा मोथा के वरिष्ठ नेता अनिमेष देबबर्मा और विधायक चित्तरंजन देबबर्मा धलाई जिले के अंबासा सर्किट हाउस में भाजपा की एक संगठनात्मक बैठक में शामिल दिखाई दे रहे हैं।

टिपरा मोथा के विधायक रणजीत देबबर्मा ने इन घटनाक्रमों पर असंतोष जताते हुए कहा कि दोनों विधायक अंबासा बैठक के अलावा खोवाई में भाजपा उम्मीदवारों के साथ एक अन्य बैठक में भी शामिल हुए थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि अनिमेष देबबर्मा पार्टी के चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे हैं और गुप्त रूप से भाजपा उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने चित्तरंजन देबबर्मा पर भी भाजपा की चुनावी रणनीति में सहयोग करने का आरोप लगाया।

वहीं, मंत्री अनिमेष देबबर्मा ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए व्यापक राजनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि केवल जातीय भावनाओं के आधार पर राजनीति करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने पार्टी की बदलती विचारधारा और असंगत रुख की भी आलोचना की।

उन्होंने कहा कि पार्टी के नारे समय-समय पर बदलते रहे हैं जो 2021 में 'ग्रेटर टिपरालैंड', 2023 में 'संवैधानिक समाधान' और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले 'टिपरासा समझौता' रहे हैं जिससे कार्यकर्ताओं, सहयोगियों और समर्थकों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।

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