कोलकाता , जून 12 -- कथित तौर पर जाली हस्ताक्षर के मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से पूछताछ के एक दिन बाद शुक्रवार को पश्चिम बंगाल अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के अधिकारी उनके घर पहुंचे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सीआईडी अधिकारी उन्हें हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर नफ़रत फैलाने वाला भाषण देने के मामले में समन का नोटिस देने गए थे। सीआईडी के सूत्रों के मुताबिक श्री बनर्जी को 16 जून को एजेंसी के मुख्यालय भवानी भवन में पेश होने के लिए कहा गया है। शहर के उत्तर-पूर्वी इलाके बागईआटी के रहने वाले राजीव सरकार ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया है। उन्होंने बनर्जी पर भड़काऊ और उत्तेजक भाषण देने का आरोप लगाया है, जिसमें उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ज़िक्र किया था। यह शिकायत बागईआटी थाना और बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर प्रकोष्ठ में ईमेल के ज़रिए दर्ज कराई गई थी।
जब सीआईडी अधिकारी श्री बनर्जी के घर पहुंचे, तो वे घर पर नहीं थे। सूत्रों ने बताया कि वे कहीं और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ बैठक में व्यस्त थे। एक घंटे से ज़्यादा इंतज़ार करने के बाद सीआईडी की टीम चली गई। आखिरकार श्री बनर्जी शाम करीब 7:20 बजे घर लौटे।
इसके बाद, शाम करीब 7:37 बजे सीआईडी की टीम फिर से उनके घर पहुंची और उन्हें समन सौंपा। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए श्री बनर्जी ने कहा कि अगर सीआईडी ने उन्हें पहले ही बता दिया होता, तो वे घर पर मौजूद रह सकते थे। उन्होंने बताया कि किसी ज़रूरी बैठक को बीच में छोड़कर जाना उनके लिए मुमकिन नहीं था। श्री बनर्जी ने कहा कि उन्हें यह नोटिस दिन में उस बयान के लिए भेजा गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि "चार मई को डीजे बजेगा"। उन्होंने कहा कि यही नियम श्री शाह के उस बयान पर भी लागू होना चाहिए जिसमें उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े उपद्रवियों को "उल्टा लटकाने" की धमकी दी थी। उन्होंने पूछा, "अगर मेरे बयानों पर सीआईडी जांच हो सकती है, तो केंद्रीय गृह मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गयी?" उन्होंने गुरुवार को हुई पूछताछ की जानकारी मीडिया में लीक होने पर भी हैरानी जताई। "मेरे घर लौटने से पहले ही, पूछताछ के दौरान पूछे गए पहले, दूसरे और तीसरे सवाल की जानकारी फैल चुकी थी। यह कैसे हो सकता है?" श्री बनर्जी ने दावा किया कि राज्य विधानसभा चुनावों में भारतीय जतना पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद, अब रात आठ बजे के बाद सड़कें खाली रहती हैं। भाजपा जीत के बड़े जुलूस नहीं निकाल पा रही है। नयी सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, "चुनाव से पहले अन्नपूर्णा भंडार जैसी कल्याणकारी योजनाओं के वादे किए गए थे। चुनाव के बाद लोग बुलडोज़र की राजनीति देख रहे हैं। ऐसे दोहरे मापदंड नहीं चल सकते।" भाजपा को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा, "डरा-धमकाकर हमारे पार्टी दफ्तरों पर कब्ज़ा नहीं किया जा सकता और न ही सीआईडी के नोटिस का इस्तेमाल डर पैदा करने के लिए किया जा सकता है।"वगीं तृणमूल के वरिष्ठ नेता एवं वकील कल्याण बनर्जी की नाराज़गी का ज़िक्र करते हुए श्री बनर्जी ने कहा, "अगर वे चाहें तो मेरी आलोचना कर सकते हैं। वे मुझे बचपन से जानते हैं और मेरे पालन-पोषण में उनकी भूमिका रही है।"गौरतलब है कि श्री बनर्जी ने गुरुवार को अभिषेक को घमंडी और वरिष्ठ लोगों का अनादर करने वाला बताया था और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दिया था कि वे अपने वफ़ादार कार्यकर्ता (यानी उन्हें) और अपने भतीजे में से किसी एक को चुनें। उन्होंने पार्टी की करारी चुनावी हार के लिए भी उन्हें (श्री अभिषथेक) ज़िम्मेदार ठहराया था और चेतावनी दी थी कि तृणमूल को तोड़ने की कगार पर खड़ा मौजूदा संकट सीधे तौर पर उनके नेतृत्व का नतीजा है।
गौरतलब है कि जाली हस्ताक्षर मामले के सिलसिले में श्री बनर्जी को 14 जून को सीआईडी के अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए भी कहा गया है।
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