जयपुर , जुलाई 15 -- उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा है कि चुनाव जीतना महत्वपूर्ण है लेकिन जनता की सेवा करना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है और लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है, जब लोग गंभीरता के साथ विचार-विमर्श करें तथा हर अन्य विचार से ऊपर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दें।

श्री राधाकृष्णन बुधवार को यहां राजस्थान विधानसभा के 75वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित 'विधायी गौरव यात्रा: पूर्व एवं वर्तमान सदस्यों के कॉन्क्लेव' के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रत्येक पीढ़ी ने देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि चुनाव मतों से जीते जाते हैं, लेकिन जनता का स्थायी सम्मान और स्नेह केवल ईमानदार जनसेवा से ही प्राप्त होता है। पूर्व और वर्तमान विधायकों को एक मंच पर लाने की इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद संस्थागत स्मृतियों को संरक्षित करते हैं और युवा जनप्रतिनिधियों को अपने पूर्ववर्तियों के अनुभव एवं मार्गदर्शन से सीखने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने इस कॉन्क्लेव की परिकल्पना करने के लिए राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की सराहना की।

लोकतांत्रिक व्यवस्था के स्वस्थ संचालन के महत्व पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं। उन्होंने कहा, " हम किसी विषय पर सहमत या असहमत हो सकते हैं, लेकिन एक बात पर हम सभी की समान सहमति होनी चाहिए कि हमारी अटूट प्रतिबद्धता जनता और संविधान के प्रति रहे।"राज्यसभा के सदस्यों को दिये अपने संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, " बहस, चर्चा या कभी-कभी व्यवधान भी अंततः किसी निर्णय तक पहुंचना चाहिए।"उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के लोकतंत्र की शक्ति केवल उसकी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा में ही निहित नहीं है, बल्कि बहस की गुणवत्ता, आचरण की मर्यादा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता में भी समान रूप से निहित है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से इन आदर्शों को भावना और व्यवहार, दोनों स्तरों पर आत्मसात करने और उनका पालन करने का आह्वान किया। लोकसभा के सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल का एक अनुभव साझा करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि उनके संयोजन में गठित संसदीय वस्त्र उप-समिति (पार्लियामेंटरी सब-कमेटी ऑन टेक्सटाइल्स) द्वारा की गयी सिफारिशों के परिणामस्वरूप अंततः टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम अस्तित्व में आयी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से बहस, चर्चा और समिति (कमेटी) के कार्यों के माध्यम से सक्रिय योगदान देने का आह्वान करते हुए कहा कि एक भी रचनात्मक सुझाव महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का आधार बन सकता है।

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