नयी दिल्ली , मई 02 -- शनिवार की देर शाम एक बड़े घटनाक्रम में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा क्षेत्र में 29 अप्रैल की पूरी मतदान प्रक्रिया को रद्द कर दिया है और 21 मई को फिर से चुनाव कराने के आदेश दिए हैं।
पुनर्मतदान के वोटों की गिनती 24 मई को होगी।
चुनाव आयोग ने आधिकारिक अधिसूचना में कहा कि गुरुवार को फलता में हुआ मतदान अब अमान्य माना जाएगा। पूरे पश्चिम बंगाल की 293 विधानसभा सीटों के वोटों की गिनती सोमवार को होगी, वहीं फलता विधानसभा सीट को इस प्रक्रिया से अलग रखा जाएगा।
अधिसूचना के अनुसार फलता विधानसभा क्षेत्र के कई बूथों से चुनाव में गंभीर अपराधों की कई शिकायतें मिली थीं, जिसके चलते आयोग ने पूरी मतदान प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला किया। दूसरे चरण के मतदान से पहले ही फलता सुर्खियों में था, जब डायमंड हार्बर पुलिस जिले के पर्यवेक्षक अजयपाल शर्मा और तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान के बीच तनाव चल रहा था।
मतदान के दिन फलता में ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप भी लगे थे। इन शिकायतों के बाद आयोग ने अपना फैसला लेने से पहले मामले की विस्तार से जांच की।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने जांच प्रक्रिया की देखरेख के लिए फलता, मगराहाट और डायमंड हार्बर का दौरा किया। हालात का जायजा लेने के बाद श्री गुप्ता ने दिल्ली में आयोग को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कथित तौर पर फलता के लगभग 30 बूथों पर फिर से मतदान कराने की सिफारिश की गई थी।
सूत्रों ने बताया कि जांच में कई चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आयी, जिनमें कई बूथों परसीसीटीवी कैमरे बंद होना भी शामिल है, जिससे कंट्रोल रूम से सीधे निगरानी करना संभव नहीं हो पाया। इसके अलावा कुछ बूथों पर ईवीएम पर पार्टी के चुनाव चिह्नों को टेप से ढक दिये जाने की शिकायतें सामने आयी। पीठासीन अधिकारियों ने हालांकि बाद में बताया कि दोपहर करीब एक बजे टेप हटा दिया गया था, लेकिन तब तक लगभग 58 प्रतिशत मतदान हो चुका था, जिससे मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मतदान के बाद फलता में कई बार अशांति की घटनाएं भी देखने को मिलीं। हाशिमनगर में तनाव बढ़ गया, जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने मारपीट और वोट डालने में रुकावट डालने का आरोप लगाया। लगातार दो दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे जाम कर दिए और दोबारा वोटिंग के साथ-साथ तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान और उनके साथियों की गिरफ्तारी की मांग की। इन हालातों को देखते हुए आयोग ने डराने-धमकाने और धमकी देने के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जहांगीर खान के करीबी साथियों इसराफुल और सुजाद्दीन शेख तथा कथित तौर पर इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। स्थानीय पुलिस को भी इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कड़ी नज़र रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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