कोलकाता , मार्च 05 -- चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले बंगलादेश की सीमा से लगे दो जिलों दक्षिण 24 परगना और कूच बिहार में चुनाव तैयारियों की धीमी गति पर चिंता व्यक्त की है।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय (सीईओ) के सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग ने हाल ही में विभिन्न जिलों में तैयारियों के काम की प्रगति की समीक्षा की और पाया कि दोनों सीमावर्ती जिलों में स्थिति संतोषजनक नहीं है।

यह आकलन पिछले सप्ताह चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नयी दिल्ली स्थित मुख्यालय में पश्चिम बंगाल के चुनावी अधिकारियों, वरिष्ठ नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के साथ आयोजित एक वर्चुअल समीक्षा बैठक के बाद किया गया।

बातचीत के दौरान, जिला स्तरीय अधिकारियों ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में चुनाव तैयारियों की स्थिति के बारे में ताजा जानकारी दी। प्राप्त जानकारियों का विश्लेषण करने के बाद, आयोग ने कथित रूप से कुछ क्षेत्रों में तैयारियों की गति धीमी पायीं।

बुधवार रात, होली की छुट्टी के बावजूद, उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती ने जिला मजिस्ट्रेटों सहित राज्य चुनाव अधिकारियों के साथ एक और संक्षिप्त वर्चुअल बैठक की। जिला मजिस्ट्रेट जिला निर्वाचन अधिकारियों के रूप में भी कार्य करते हैं।

आयोग के सूत्रों ने कहा कि बैठक के दौरान श्री भारती ने दक्षिण 24 परगना और कूच बिहार से प्राप्त प्रगति रिपोर्टों पर असंतोष व्यक्त किया और अधिकारियों से काम की गति में तेजी लाने का आग्रह किया।

सीईओ कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा, " चुनाव आयोग की पूरी पीठ के राज्य में पहुंचने से पहले चुनाव की तैयारियों में तेजी लाने के लिए आवश्यक उपायों की रूपरेखा तैयार करने के लिए श्री भारती द्वारा गुरुवार को चुनावी अधिकारियों के साथ वर्चुअल चर्चा का एक और दौर आयोजित करने की उम्मीद है। "संभावित कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ आठ मार्च की रात को पश्चिम बंगाल पहुंचेगी। नौ और 10 मार्च को, आयोग राज्य के अधिकारियों के साथ व्यापक बैठकों की एक श्रृंखला आयोजित करेगा, ताकि समग्र चुनाव तैयारियों का आकलन किया जा सके और 'तार्किक विसंगति' श्रेणी के अंतर्गत चिह्नित मतदाता दस्तावेजों के चल रहे न्यायिक निर्णय की समीक्षा की जा सके।

इसी बीच, कोलकाता में मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गयीं। बुधवार देर रात मध्य कोलकाता में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय के बाहर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रात भर का धरना प्रदर्शन शुरू किया।

यह विरोध प्रदर्शन इस मांग को लेकर किया गया कि चुनाव आयोग विवादित मतदाता दस्तावेजों से संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने और सभी वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बहाल होने तक विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा न करे।

गुरुवार सुबह भी प्रदर्शन जारी रहा, जिसमें माकपा नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उन्हें पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल से मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती।

राज्य की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की गयी, जिसमें न्यायिक निर्णय के लिए भेजे गये नामों को शामिल नहीं किया गया। चुनाव अधिकारियों ने संकेत दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम एवं प्रगति के आधार पर समय-समय पर पूरक मतदाता सूचियां जारी की जाएंगी।

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