कोलकाता , मार्च 14 -- भारत चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनसभा से पहले आज उत्तरी कोलकाता के गिरीश पार्क में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थकों के बीच हुई कथित झड़प को लेकर कोलकाता पुलिस से एक तत्काल रिपोर्ट मांगी है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय सूत्रों ने बताया कि आयोग ने शहर के पुलिस आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा है कि घटना के दौरान पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कानून-व्यवस्था को प्रभावी ढंग से क्यों नहीं बनाए रखा जा सका।
यह झड़प राज्य मंत्री शशि पांजा के आवास के पास उस समय हुई, जब भाजपा कार्यकर्ताओं को ले जा रही बसें ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होने वाली रैली की ओर जा रही थीं। रिपोर्टों के अनुसार दोनों पार्टियों के समर्थकों ने कथित तौर पर एक-दूसरे पर पत्थर फेंके और रैली की ओर जा रहे वाहनों को भी निशाना बनाया गया।
सीईओ के कार्यालय ने पुलिसकर्मियों की तैनाती और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। अधिकारियों ने यह सवाल भी उठाया है कि जब इलाके में पत्थरबाजी और तोड़फोड़ हो रही थी, तब पुलिस कथित तौर पर निष्क्रिय क्यों बनी रही।
बताया जा रहा है कि आयोग ने इस घटना पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है, विशेष रूप से गिरीश पार्क पुलिस स्टेशन उस स्थान के बहुत करीब स्थित है जहाँ यह झड़प हुई थी। आयोग ने शहर की पुलिस से स्पष्ट करने को कहा है कि पुलिस स्टेशन की निकटता और सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद स्थिति को प्रभावी ढंग से क्यों नहीं संभाला गया।
इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाया कि पार्टी समर्थकों को ले जा रही कई बसों पर ब्रिगेड रैली की ओर जाते समय हमला किया गया।
उन्होंने एक बयान में दावा किया कि सत्ताधारी पार्टी से कथित तौर पर जुड़े उपद्रवियों ने ईंटें और पत्थर फेंककर बसों को निशाना बनाया और पार्टी के कई कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यह हमला मंत्री शशि पांजा के इशारे पर किया गया था। भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि कथित हमलावरों में से कई के नाम पार्टी के संज्ञान में आए हैं और उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी ऐसी घटनाओं का राजनीतिक रूप से जवाब देगी।
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