नयी दिल्ली , अप्रैल 08 -- तृणमूल कांग्रेस के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच बुधवार को हुई बैठक काफी गरमागरम रही तथा पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े मतदाताओं के कथित मताधिकार छीनने के मुद्दे पर तीखी नोंकझोंक हुई।

पार्टी ने कहा कि श्री डेरेक ओ ब्रायन, सुश्री सागरिका घोष, सुश्री मेनका गुरुस्वामी तथा श्री साकेत गोखले के चार सदस्यीय तृणमूल प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) से मुलाकात की और राज्य में एसआईआर के कारण लोगों के 'मताधिकार छीने जाने' का मुद्दा उठाया।

सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान तीखी बहस हुई। इस दौरान श्री ओ ब्रायन चुनाव आयोग पर चिल्लाये और मुख्य चुनाव आयुक्त को न बोलने के लिए कहा। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ने श्री ओ ब्रायन से आयोग कक्ष की गरिमा बनाये रखने को कहा। उन्होंने कहा कि चिल्लाना और अभद्र व्यवहार उचित नहीं है।

यह बैठक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य पश्चिम बंगाल में मतदाताओं को कथित तौर पर बाहर किए जाने को लेकर तृणमूल और चुनाव आयोग के बीच चल रही तनातनी को दर्शाती है। तृणमूल नेताओं ने बार-बार दावा किया है कि विशेष रूप से वंचित समुदायों को निशाना बनाकर मतदाताओं की भागीदारी को दबाने के लिए कुछ प्रशासनिक उपायों का उपयोग किया जा रहा है, जबकि आयोग का कहना है कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रक्रियाओं का पालन करता है।

विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना राज्य में चुनावी निगरानी के बढ़ते राजनीतीकरण को भी जाहिर करती है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही चुनाव आयोग की भूमिका की बारीकी से जांच कर रहे हैं। तृणमूल प्रतिनिधिमंडल का कड़ा रुख संकेत देता है कि पार्टी मतदाताओं के अधिकारों पर जवाबदेही तय करने के लिए आक्रामक रूप से आगे बढ़ने का इरादा रखती है।

चुनाव आयोग ने बैठक में लगाये गये विशिष्ट आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों का संकेत है कि वह प्रतिनिधिमंडल की ओर से पेश साक्ष्यों की समीक्षा कर रहा है और अगले कुछ दिनों में औपचारिक रूप से जवाब देने की उम्मीद है।

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