रायपुर , अक्टूबर 13 -- छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नागरिकों, विशेषकर स्थानांतरित और अनुपस्थित श्रेणी के मतदाताओं के नाम सार्वजनिक करने की मांग की है।
श्री अकबर ने मंगलवार को जारी बयान में कहा, "देश में चुनाव आयोग है, न कि भारत सरकार चुनाव आयोग। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो आयोग के बजाय सरकार के प्रतिनिधि जवाब देने के लिए सामने क्यों आते हैं।" उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसकी कार्यप्रणाली से संबंधित सवालों का जवाब आयोग को स्वयं देना चाहिए।
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
एसआईआर प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए श्री अकबर ने दावा किया कि वर्ष 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच कुल मतों का अंतर छह लाख 32 हजार 382 यानी 4.04 प्रतिशत था, जबकि एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची से 24 लाख 99 हजार 823 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। उनके अनुसार, यह संख्या दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच रहे मतों के अंतर से लगभग चार गुना अधिक है।
उन्होंने दावा किया कि सूची से हटाए गए मतदाताओं में 19 लाख 13 हजार 540 लोगों को स्थानांतरित अथवा अनुपस्थित श्रेणी में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार, शिक्षा और अन्य कारणों से अपने पंजीकृत पते पर उपलब्ध नहीं रहने वाले नागरिकों के नाम भी मतदाता सूची से हटा दिए गए।
श्री अकबर ने सवाल उठाया कि क्या संबंधित मतदाताओं को व्यक्तिगत सूचना दी गई और उनके नाम हटाने से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया। उन्होंने कहा कि केवल निवास स्थान पर अस्थायी अनुपस्थिति के आधार पर किसी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित