सिलीगुड़ी , मई 06 -- उत्तर बंगाल में चुनावी पराजय के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने संगठन की कार्यप्रणाली और नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाए हैं।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने हार के लिए चुनाव आयोग की मतगणना प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया, वहीं क्षेत्र के कुछ नेताओं ने सीधे तौर पर उन्हें ही पराजय का कारण बताया।
मालदा के वरिष्ठ नेता कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने कहा कि ममता बनर्जी द्वारा "ईंट-ईंट जोड़कर" खड़ी की गई पार्टी को "एक व्यक्ति" ने इस स्थिति तक पहुंचा दिया। उन्होंने पार्टी में "कॉरपोरेट शैली" की कार्यप्रणाली की भी आलोचना की।
राजगंज के पूर्व विधायक खगेश्वर राय ने रणनीतिक फैसलों के लिए आई-पैक पर निर्भरता को हार का कारण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठनात्मक नियंत्रण को बाहरी एजेंसी के हाथों सौंपना नुकसानदेह साबित हुआ।
कूचबिहार में भी असंतोष सामने आया है। वरिष्ठ नेता रवींद्रनाथ घोष ने उम्मीदवार चयन और पार्टी की वर्तमान कार्यशैली पर नाराजगी जतायी। उनकी बेटी ने भी आरोप लगाया कि पार्टी में "सिंडिकेट राज" कायम हो गया है और जमीनी रिपोर्ट बिना "सिफारिश" शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंचती।
पूर्व जिला अध्यक्ष पापिया घोष ने कहा कि 2021 के बाद पार्टी का माहौल घुटनभरा हो गया और कार्यकर्ताओं को "कंपनी के कर्मचारियों" की तरह बना दिया गया।
इस बीच सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देव ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी नेतृत्व को इस्तीफा देने की इच्छा जताई है। पापिया घोष ने सिलीगुड़ी में पार्टी की गिरावट के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।
असंतोष केवल सिलीगुड़ी तक सीमित नहीं है। अलीपुरद्वार के पूर्व विधायक सौरव चक्रवर्ती ने भी संगठनात्मक ढांचे की आलोचना की है, जबकि पूर्व मंत्री उदयन गुहा मतगणना के बाद केंद्रीय बलों की सुरक्षा में चुपचाप अपने घर लौट गए।
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