कोलकाता , जून 17 -- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी ने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए एक बड़ा संगठनात्मक फेरबदल शुरू किया है।
पार्टी में आंतरिक मतभेदों और बगावत की खबरों के बीच मंगलवार को जिला और संगठनात्मक इकाइयों में व्यापक बदलाव किये गये हैं और पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी के कई अनुभवी नेताओं और पुराने सहयोगियों को जिला अध्यक्ष तथा अध्यक्ष सहित प्रमुख पदों पर नियुक्त किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम का उद्देश्य संगठन के भीतर नियंत्रण मजबूत करना और चुनावी झटके के बाद पार्टी के ढांचे को फिर से खड़ा करना है।
नयी घोषित सूची के अनुसार, श्री कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले का प्रभार दिया गया है, जबकि श्री देबाशीष कुमार की जगह श्री बैशवानर चट्टोपाध्याय को दक्षिण कोलकाता जिला तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अनुभवी नेता श्री असित मजूमदार को श्रीरामपुर-हुगली संगठनात्मक जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यह काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी ने हालिया विधानसभा चुनावों में श्री मजूमदार के बजाय चुचुड़ा विधानसभा क्षेत्र से श्री देबांगशु भट्टाचार्य को उम्मीदवार बनाया था लेकिन पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया है कि चुनाव परिणामों के बाद नेतृत्व का श्री भट्टाचार्य पर भरोसा कम हुआ है।
दार्जिलिंग में गौतम देव को जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि बैरकपुर संगठनात्मक जिले में पार्थ भौमिक की जगह अमित गुप्ता को लाया गया है। हावड़ा सदर जिले में भी बड़े बदलाव किए गए हैं, जहां पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक अरूप रॉय को जिला अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह पूर्व मंत्री राजीव बनर्जी को यह जिम्मेदारी दी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नियुक्तियां पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों और असंतोष के बीच अनुभवी नेताओं पर सुश्री बनर्जी की बढ़ती निर्भरता को दर्शाती हैं।
इस फेरबदल को संगठन को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए पार्टी को तैयार करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि इन बदलावों से एक स्पष्ट संदेश गया है कि पार्टी मुश्किल समय में अपने वरिष्ठ और परखे हुए नेताओं पर अधिक भरोसा करना चाहती है।
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