नयी दिल्ली , मार्च 10 -- चीन से सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (एपीआई) का आयात लगातार बढ़ रहा है और वित्त वर्ष 2024-25 में यह 74 प्रतिशत के पार पहुंच गया है।

स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने मंगलवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने कुल 39,215 करोड़ रुपये के एपीआई का आयात किया। इसमें चीन से आयात 29,064 करोड़ रुपये (74.1 प्रतिशत) रहा। दो साल पहले वित्त वर्ष 2022-23 में उसकी हिस्सेदारी 70.5 प्रतिशत थी।

उत्तर में कहा गया है कि भारत ने चीन के बाद सबसे अधिक 1,141 करोड़ रुपये का एपीआई इटली से खरीदा। इसके बाद क्रमशः सिंगापुर, अमेरिका और स्पेन का स्थान रहा।

श्री नड्डा ने पूरक प्रश्नों के उत्तर में स्पष्ट किया कि दवा कंपनियां पूरी तरह बाजार कारकों के आधार पर यह तय करती हैं कि दवा बनाने के लिए एपीआई किस देश से खरीदना है, इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।

उन्होंने कहा कि यह सही है कि भारत बड़ी मात्रा में एपीआई का आयात करता है, लेकिन उससे अधिक निर्यात करता है। पिछले वित्त वर्ष में आयात 39,215 करोड़ रुपये पर और निर्यात 41,493 करोड़ रुपये पर रहा था। सरकार ने महत्पपूर्ण शुरुआती पदार्थों (केएसएम), ड्रग इंटमीडियरी (डीआई) और एपीआई के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए साल 2020 में 6,940 करोड़ रुपये की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की शुरुआत की थी जो वित्त वर्ष 2028-29 तक जारी रहेगी। इसका उद्देश्य चीन पर निर्भरता कम करना है।

इस योजना में 41 बल्क ड्र्ग्स को शामिल किया गया है। अब तक 33 बल्ड ड्रग्स की 48 परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गयी है। इनमें 4,814 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस परियोजनाओं के उत्पादों की कुल बिक्री 2,720 करोड़ रुपये और निर्यात 520 करोड़ रुपये रहा है। इनमें 4,896 लोगों को रोजगार भी मिला है। इसका असर यह हुआ है कि पेनिसिलीन जी, क्वैवुनैलिक, लैनिक एसिड और रिफैमपिसिन का आयात पूरी तरह बंद हो गया है और भारत अब तीनों का निर्यात कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत जब कोई एपीआई, केएसएम या डीआई खुद बनाने लगता है तो चीन उसकी कीमत घटा देता है। इससे आयात बढ़ जाता है। सरकार बाजार को स्थिर करने के लिए डंपिंग रोधी शुल्क लगाती है और न्यूनतम आयात मूल्य तय करती है।

उन्होंने कहा कि बहुत जल्द भारत एपीआई, डीआई और केएसएम में आत्मनिर्भर बन जायेगा।

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