नयी दिल्ली , अक्टूबर 23 -- कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ भारतीय सैनिकों के टकराव की खबरों को लेकर सरकार पर जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले में स्थिति स्पष्ट कर देश को सच बताना चाहिए।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत-चीन सीमा पर लंबे समय से टकराव की सूचना है। सरकार इस सूचना को छिपा रही है। वह जून-जुलाई से ही इस जानकारी को सामने नहीं आने दे रही थी लेकिन भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अब इसकी पुष्टि की है।

उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में चीनी सेना का मुकाबला कर रहे आईटीबीपी सहित सभी बहादुर जवानों को कांग्रेस सलाम करती है लेकिन दुखद स्थिति यह है कि सरकार न तो देश के वीर सैनिकों की शहादत का सम्मान करती है और न ही उनकी बहादुरी की सराहना करती है। गलवान घाटी में 2020 में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय श्री मोदी ने कहा था कि न कोई भारतीय क्षेत्र में घुसा है और न कोई घुसा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस महानिदेशकों के सम्मेलन में भी बताया गया था कि 65 में से 26 गश्त बिंदुओं पर भारत का नियंत्रण नहीं रह गया है।

श्री खेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से चीन को दी गई कथित 'क्लीन चिट' के कारण लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीन दुस्साहस दिखा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आईटीबीपी महानिदेशक के बयान के बाद सरकार की ओर से आधिकारिक बयान जारी करने की बात कहकर इस मुद्दे को दबाने की कोशिश की गई।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन के मुद्दे पर भारत का पक्ष मजबूती से रखना चाहिए लेकिन वह विपक्ष पर हमला करने में लगे रहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री की चीनी राष्ट्रपति के साथ कई दौर की मुलाकातों के बावजूद लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील मुद्दों को नहीं उठाया जाता है। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि आखिर श्री मोदी को इस मामले को उठाने में किस बात का डर है।

श्री खेड़ा ने कहा कि भारत चीन की शर्तें मानते हुए उसके दंड झेलता रहा और उसके हमलों का सामना करता रहा। चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 99 अरब डॉलर से बढ़कर 112 अरब डॉलर हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत चीन के सामने झुकता रहा। चीनी के नागरिकों के लिए यात्रा प्रतिबंध हटाए गए और वीजा की संख्या बढ़ाई गई।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित