बीजिंग , मई 26 -- प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बीजिंग यात्रा के बाद मंगलवार को जारी संयुक्त बयान के अनुसार, चीन-पाकिस्तान ने अपनी 'सदाबहार रणनीतिक सहभागी साझेदारी' को गहरा करने और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के विकास में तेजी लाने पर नयी सहमति जतायी है।
इसमें ग्वादर बंदरगाह को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी हब में बदलने की योजनाएं भी शामिल हैं।
श्री शरीफ ने बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग दोनों से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने संयुक्त बयान जारी किया। इसने उनकी 'सदाबहार रणनीतिक सहभागी साझेदारी' को और मजबूती दी तथा बुनियादी ढांचे, खनिजों, डिजिटल अर्थव्यवस्था, अंतरिक्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े एक महत्वाकांक्षी एजेंडे की रूपरेखा तैयार की।
संयुक्त बयान में 'सीपीईसी 2.0 को नये सिरे से आगे बढ़ाने का उल्लेख किया गया है, जो बेल्ट एंड रोड की इस प्रमुख परियोजना का एक उच्च-गुणवत्ता वाला अपग्रेड है और चीन के पश्चिमी क्षेत्रों को पाकिस्तान के अरब सागर तट से जोड़ता है।"बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष काराकोरम राजमार्ग (थकोट-रायकोट खंड) के चरणबद्ध और व्यवस्थित पुनर्गठन सहित प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच जमीनी संपर्क को मजबूत करने के लिए खुंजराब दर्रे के उपयोग को बढ़ावा देने पर सहमत हुए हैं। उन्होंने क्षेत्रीय व्यापार और रसद (लॉजिस्टिक्स) हब के रूप में ग्वादर बंदरगाह की क्षमता का पूरी तरह से लाभ उठाने की योजनाओं को भी दोहराया।
दोनों पक्षों ने चीन-पाकिस्तान के तय किये गये मॉडल के तहत सीपीईसी के विकास में किसी तीसरे देश की भागीदारी का स्वागत किया। इसके साथ ही उन्होंने आपसी हित के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
संयुक्त बयान में कहा गया, "दोनों नेता साझा भविष्य के साथ एक और अधिक करीबी चीन-पाकिस्तान समुदाय के निर्माण में तेजी लाने और अपने मूल हितों की रक्षा करने में एक-दूसरे का दृढ़ता से समर्थन करने पर सहमत हुए हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों को राजनीतिक मार्गदर्शन और मजबूत गति प्रदान करेगा।"दोनों पक्षों ने नये युग में साझा भविष्य के साथ एक और अधिक करीबी चीन-पाकिस्तान समुदाय को बढ़ावा देने की कार्ययोजना को लगातार आगे बढ़ाने, सीपीईसी 2.0 के विकास में तेजी लाने, एक अपग्रेड द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते को तैयार करने और कृत्रिम बुद्धिमता (एआई), डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृषि व अन्य क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर सहमति जतायी।
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि दोनों पक्षों ने अर्थव्यवस्था और व्यापार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कृषि और खाद्य, मानव संसाधन तथा अन्य क्षेत्रों से जुड़े कई सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं।
इस यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने आपसी हित के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। पाकिस्तानी पक्ष ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग के चार प्रस्तावों का समर्थन किया।
चीनी पक्ष ने पश्चिमी एशिया में शांति के लिए मध्यस्थता करने और एक सक्रिय रुख दिखाने के लिए पाकिस्तान की सराहना की। दोनों पक्ष द्वितीय विश्व युद्ध के परिणामों की दृढ़ता से रक्षा करने, फासीवाद और सैन्यवाद को पुनर्जीवित करने के किसी भी प्रयास का विरोध करने तथा युद्ध के बाद की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, विश्व शांति व सुरक्षा के साथ-साथ ऐतिहासिक सच्चाई और अंतरराष्ट्रीय न्याय को संयुक्त रूप से बनाये रखने पर सहमत हुए।
दुनिया इस समय सदी के सबसे बड़े और तेजी से होते बदलावों का सामना कर रही है। चीन-पाकिस्तान नये मोड़ पर पहुंच गये हैं और दोनों के सामने अपने-अपने आधुनिकीकरण तथा विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के महत्वपूर्ण अवसर मौजूद हैं। संयुक्त बयान के अनुसार, श्री माओ निंग ने कहा कि चूंकि दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, इसलिए चीन उच्च स्तरीय राजनीतिक आपसी विश्वास, व्यावहारिक सहयोग, सुरक्षा सहयोग और अंतरराष्ट्रीय तालमेल को गहरा करने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने को तैयार है, ताकि चीन-पाकिस्तान संबंधों का नया अध्याय लिखा जा सके।
दोनों नेता अफगानिस्तान के मुद्दे पर करीबी संपर्क और तालमेल बनाये रखने पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम) आदि सहित किसी भी व्यक्ति, समूह या दल को क्षेत्रीय सुरक्षा और हितों को नुकसान पहुंचाने व खतरा पैदा करने या आतंकवादी कृत्यों और गतिविधियों को अंजाम देने के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति न दी जाये।
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