ईटानगर , सितंबर 05 -- अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) केटी परनाइक ने चीन के बढ़ते रणनीतिक आक्रामक रुख के बीच भारत की क्षेत्रीय अखंडता एवं राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए लगातार सतर्कता, राष्ट्रीय एकता और तैयारी बनाए रखने का आह्वान किया है।

शुक्रवार और शनिवार को पुणे में आयोजित दो दिवसीय पीआईसी-सीसीएएस चीन सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए, श्री परनाइक ने कहा कि उभरती हुई भू-राजनीतिक चुनौतियों का प्रभावी तरीके से सामना करने के लिए भारत को चीन की बदलती राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य और तकनीकी क्षमताओं की व्यापक समझ विकसित करनी चाहिए।

राज्यपाल ने चीन को भारत का "सभ्यतागत पड़ोसी" बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सदियों से सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंध रहे हैं।

उन्होंने हालांकि चेतावनी दी कि चीन का समकालीन रणनीतिक दृष्टिकोण विशेष रूप से क्षेत्रीय दावों एवं विवादित सीमाओं पर आक्रामक रुख के माध्यम से विस्तारवादी प्रवृत्तियों को दर्शाता रहता है।

अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के इलाकों पर चीन के दावों का उल्लेख करते हुए, श्री परनाइक ने कहा कि भारत को अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सतर्क, एकजुट और पूरी तरह तैयार रहना चाहिए।

राज्यपाल ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में चीन के एक बड़ी वैश्विक आर्थिक, तकनीकी और सैन्य शक्ति के रूप में परिवर्तित होने पर बल दिया।

उन्होंने अवलोकन किया कि चीन ने अवसंरचना में निवेश, आर्थिक मदद और 'बेल्ट एवं सड़क पहल' (बीआरआई) जैसी पहलों के माध्यम से एशिया, अफ्रीका और दूसरे इलाकों में अपना असर बढ़ाया है।

चीन की वैश्विक पहुंच के दायरे की पहचान करते हुए, श्रा परनाइक ने कहा कि इस क्षेत्र के देशों को ऐसे जुड़ाव के दीर्धकालीन रणनीतिक असर का सावधानी से आकलन करने की ज़रूरत है। अरुणाचल प्रदेश पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्यपाल ने राज्य को भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया क्योंकि यह भारत की पूर्वी सीमा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सीमावर्ती इलाकों के निवाली राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं; उनकी स्थानीय जानकारी, मुश्किल हालात का सामना करने की क्षमता और वहां लगातार मौजूदगी सीमा प्रबंधन और हालात की जानकारी रखने में बड़ा योगदान देती है।उन्होंने कहा कि सशक्त, समृद्ध और अच्छी तरह से जुड़े सीमावर्ती समुदाय राष्ट्रीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

राज्यपाल ने सीमावर्ती इलाकों में सड़कों, संपर्क नेटवर्क और दूसरी अवसंरचना को बेहतर बनाने के लिए भारत सरकार की लगातार कोशिशों पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के विकास से परिचालन तैयारी मज़बूत होती है और साथ ही वहाँ रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।

श्री परनाइक ने चीन की दिशा और भारत तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए उसके निहितार्थों की अधिक गहरी एवं सूक्ष्म समझ विकसित करने के लिए नीति-निर्माताओं, विद्वानों, रणनीतिक विचारकों और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच अधिक सहयोग का भी आह्वान किया।

पुणे इंटरनेशनल सेंटर और सेंटर फॉर चाइना एनालिसिस एंड स्ट्रैटेजी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में प्रमुख नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, सैन्य नेताओं, विद्वानों और रणनीतिक विश्लेषकों को मंच पर लाया गया।

विचार-विमर्श में भाग लेने वालों में सीसीएएस के अध्यक्ष जयदेव रानाडे, पीआईसी के उपाध्यक्ष डॉ. विजय केलकर, पूर्व राजदूत गौतम बंबावाले और पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे शामिल थे। इन चर्चाओं में भारत-चीन के द्विपक्षीय संबंधों और सीमा से जुड़े हालात, सैन्य और सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम, व्यापार और आर्थिक रुझान, तकनीकी और डिजिटल प्रगति, और एशिया में हो रहे व्यापक भू-राजनीतिक बदलावों पर चर्चा की गई।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और देश की सीमाओं पर शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, सीमावर्ती इलाकों खासकर अरुणाचल प्रदेश के विकास के साथ-साथ रणनीतिक तैयारी को भी अहम बताया।

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