नयी दिल्ली , सितंबर 01 -- केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के वास्ते चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी है।

आधिकारिक सूचना में मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया गया है कि नयी सीमा आगामी 15 सितंबर से 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। वर्तमान में देशभर के चीनी व्यापारियों के लिए एक अगस्त से 4,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा लागू है। संशोधित प्रावधानों के तहत 15 सितंबर से व्यापारी किसी भी स्टॉक को प्राप्ति की तारीख से 30 दिन से अधिक अपने पास नहीं रख सकेंगे और किसी भी स्थान पर किसी भी समय 2,000 क्विंटल से अधिक चीनी का भंडार नहीं रख सकेंगे।

सूचना में यह भी कहा गया है कि कोलकाता और इसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों के लिए स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल ही रहेगी। सरकार के अनुसार कोलकाता उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से चीनी प्राप्त करता है तथा पूर्वोत्तर सहित देश के पूर्वी हिस्से को इसकी आपूर्ति करता है इसलिए वहां चीनी स्टाक की मौजूदा सीमा बरकरार रखी गई है।

सरकार ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य जमाखोरी पर अंकुश लगाना, सट्टेबाजी को हतोत्साहित करना और चीनी के अत्यधिक भंडार को रोकना है। इससे आपूर्ति श्रृंखला में चीनी की सुचारू आवाजाही तथा उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर इसकी निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। सरकार ने देशभर में चीनी मिलों, डीलरों और व्यापारियों सहित चीनी भंडारों की गहन निगरानी और भौतिक सत्यापन किया है। इससे अतिरिक्त भंडार रखने, जानकारी छिपाने तथा भंडार की आवाजाही और बिक्री में अनियमितताओं के मामलों की पहचान हुई है।

आधिकारिक सूचना के अनुसार इन उपायों और बाजार में चीनी की उपलब्धता में सुधार के परिणामस्वरूप हाल के दिनों में मिल से सीधे चीनी की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। खुदरा कीमतों में भी गिरावट का रुझान शुरू हुआ है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से चीनी भंडार की नियमित घोषणा और अद्यतन करने की व्यवस्था की गई है। सरकार ने कहा कि आने वाले सप्ताहों में चीनी मिलों, डीलरों और व्यापारियों के भंडार का भौतिक सत्यापन जारी रहेगा।

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