पटना , अगस्त 12 -- ाज्य में चीनी उद्योग को नई रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने भूमि से जुड़े मामलों के समाधान की दिशा में भी कदम तेज कर दिए हैं। चीनी मिलों के सुचारू प्रबंधन एवं संचालन में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए सरकार अब मिलों से जुड़े लंबित न्यायालयी मामलों की गहन समीक्षा कर रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में चीनी मिलों से जुड़े भूमि मामलों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में गन्ना उद्योग मंत्री संजय पासवान भी उपस्थित थे।राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा गन्ना उद्योग विभाग के सचिवों सहित संबंधित अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

समीक्षा के दौरान पूर्वी चंपारण स्थित बारा चकिया चीनी मिल की संपूर्ण परिसंपत्ति से संबंधित मामले पर चर्चा की गई। इसमें कुल 1,008 एकड़ भूमि शामिल है, जिसमें बेतिया राज की भूमि भी सम्मिलित है। इसी प्रकार मोतिहारी स्थित मेसर्स हनुमान शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड की चीनी मिल से संबंधित भूमि मामले की भी समीक्षा की गई। इसमें 13 बीघा 6 कट्ठा 13 धूर फ्रीहोल्ड भूमि तथा बेतिया राज की 24 बीघा 15 कट्ठा 2 धूर लीजहोल्ड भूमि शामिल है। इसके अतिरिक्त गोपालगंज की सासामुसा चीनी मिल से संबंधित भूमि मामलों की भी समीक्षा की गई। इसमें 44 बीघा 8 कट्ठा 7 धूर स्वामित्व वाली भूमि, 21 बीघा 19 कट्ठा 9 धूर हथुआ राज की मुकर्ररी लीज भूमि से संबंधित मामले शामिल हैं।

बैठक में राज्य की चीनी मिलों से संबंधित विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों की मामलेवार समीक्षा की गई। विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें सरकारी एवं रैयती भूमि शामिल है। अधिकारियों से इन मामलों में अब तक हुई न्यायालयी कार्रवाई, विभाग के पास उपलब्ध राजस्व अभिलेखों तथा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए तथ्यों की जानकारी ली गई।

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