पटना , मई 28 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने गुरुवार को कहा कि बिहार में चीनी उद्योग के पुनर्जीवन से राज्य के गन्ना किसानों के लिए "स्वर्णिम युग" की शुरुआत होने जा रही है।
श्री पांडेय ने आज बयान जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने "सात निश्चय-3" के तहत राज्य में चीनी उद्योग को मिशन मोड में पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत 25 नई अत्याधुनिक चीनी मिलों की स्थापना और वर्षों से बंद पड़ी मिलों को फिर से शुरू करने की योजना शामिल है।
श्री पांडेय ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "आत्मनिर्भर भारत", "किसान कल्याण" और "विकसित भारत 2047" के संकल्प को जमीन पर उतारने वाला साबित होगा।उन्होंने कहा कि एक समय बिहार देश का प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य था, जहां मोतिहारी, लौरिया, सुगौली, रीगा, मझौलिया और सासामुसा जैसी चीनी मिलें राज्य की पहचान थीं,लेकिन 1990 के बाद कई मिलें बंद हो गईं, जिससे किसानों और श्रमिकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।
श्री पांडेय ने आरोप लगाया कि उस दौर में किसानों को अपनी उपज लेकर दूसरे राज्यों में जाना पड़ा और गन्ना बेल्ट क्षेत्र के विकास पर असर पड़ा। उन्होंने कहा कि अब नई नीति के तहत 25 नई मिलों की स्थापना से किसानों को उचित मूल्य मिलेगा और करीब 1.25 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, गोदाम और कोल्ड स्टोरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा।उन्होंने दावा किया कि यह योजना गन्ना बेल्ट क्षेत्रों पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीतामढ़ी और सीवान के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
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