बैतूल , अगस्त 11 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आदिवासी बहुल भीमपुर विकासखंड के चिल्लौर गांव में करोड़ों रुपये की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन तैयार कर दिया गया है, लेकिन ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इसे अब तक शुरू नहीं किया गया है। हालत यह है कि तैयार भवन धीरे-धीरे बदहाल हो रहा है और ग्रामीण इलाज के लिए भीमपुर तथा बैतूल जाने को मजबूर हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने चिल्लौर और आसपास के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन का निर्माण कराया था। निर्माण पूरा होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब मामूली बीमारी से लेकर आपात स्थिति तक के उपचार के लिए उन्हें दूर नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन भवन तैयार होने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं।

ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल भवन करीब एक साल से उद्घाटन की राह देख रहा है। चर्चा है कि स्थानीय विधायक के हाथों इसका उद्घाटन कराया जाना था, लेकिन लंबे समय से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इस बीच भवन का उपयोग शुरू नहीं होने से उसकी स्थिति भी खराब होती जा रही है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब सरकार ने अस्पताल भवन के निर्माण पर इतनी बड़ी राशि खर्च कर दी है तो फिर डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की पदस्थापना कर स्वास्थ्य सेवाएं शुरू क्यों नहीं की जा रही हैं। उनका कहना है कि अस्पताल शुरू होने में जितनी देरी होगी, उतना ही सरकारी निवेश का उद्देश्य अधूरा रहेगा।

चिल्लौर का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फिलहाल ग्रामीणों के लिए एक ऐसे सरकारी भवन की तस्वीर पेश कर रहा है, जिसमें इलाज की व्यवस्था ही नहीं है। न नियमित चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध हैं और न ही स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती। देखरेख और नियमित उपयोग के अभाव में भवन के जर्जर होने की आशंका भी बढ़ती जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में अक्सर भवन निर्माण को उपलब्धि के तौर पर गिनाया जाता है, लेकिन असली जरूरत भवन बनने के बाद शुरू होने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की है। चिल्लौर में यही कड़ी पूरी नहीं हो पाई है।

चिल्लौर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रहते हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शुरू नहीं होने के कारण ग्रामीणों को उपचार के लिए भीमपुर अथवा जिला मुख्यालय बैतूल का रुख करना पड़ता है। सामान्य बीमारी में तो लोग किसी तरह सफर कर लेते हैं, लेकिन दुर्घटना, प्रसव या गंभीर बीमारी की स्थिति में लंबी दूरी तय करना उनके लिए परेशानी के साथ जोखिम भी बढ़ा देता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि अस्पताल में डॉक्टर और जरूरी स्टाफ की नियुक्ति कर इसे नियमित रूप से शुरू कर दिया जाए तो आसपास के कई गांवों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।

अब ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से अस्पताल को जल्द शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किया गया भवन यदि इलाज देने के बजाय बंद पड़ा रहा तो यह सरकारी धन के उपयोग और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर बड़ा सवाल है। ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि उद्घाटन की प्रतीक्षा कर रहे इस अस्पताल में इलाज की शुरुआत आखिर कब होगी।

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