चित्रकूट , सितंबर 23 -- उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में घर के अंदर सो रहे अपने ही बेटे की गर्दन कुल्हाड़ी से काटकर अलग कर देने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश शेषमणि शुक्ला ने आरोपी पिता को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपी को 12,000 रुपये के अर्थदण्ड से भी दण्डित किया है। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी श्यामसुंदर मिश्रा ने बताया कि बीती 28 अक्टूबर 2024 को मऊ थाने में दुवारी गांव के निवासी नत्थू ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वादी ने बताया था कि उसका पुत्र राजकुमार निषाद उर्फ भीम सेन का पत्नी के साथ आए दिन विवाद होता था। विवाद को लेकर उसने पत्नी शिवकुमारी की पिटाई कर दी थी। इससे उसका हाथ टूट गया था। बीती 27 अक्टूबर 2024 की रात घर के अंदर दोनों के बीच फिर से विवाद हुआ। इस दौरान वहां सो रहे उनके बच्चे अनुज, कोमल और कुंती की नींद खुल गई, लेकिन सबसे छोटे बेटे सत्यम (5) की नींद नहीं खुली। शोरगुल सुनकर बगल वाले घर से अन्य सदस्यों के आने पर शिवकुमारी के साथ कमरे में मौजूद तीन बच्चों अनुज, कोमल और कुंती को बाहर निकाल लिया गया, मगर सत्यम चारपाई में सोता रहा। इस दौरान राजकुमार ने अपनी पत्नी को घर के दरवाजे की कुंडी बंद करने के बहाने बाहर कर दिया और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। इस बीच सत्यम की नींद खुल गई और वह मां के पास जाने के लिए रोने लगा। इस पर राजकुमार ने धारदार कुल्हाड़ी से बेहद नृसंशतापूर्वक सत्यम की गर्दन को धड़ से अलग कर दिया।
कमरे के बाहर शिवकुमारी अपने बच्चे की जान बचाने के लिए गुहार लगाती रही, मगर शैतान का रूप ले चुके राजकुमार ने किसी की बात नहीं सुनी और अपने बेटे की गर्दन काटने के बाद एक घड़े में डालकर रख दिया। इस दौरान गांव में घटना की जानकारी होने पर तमाम लोग मौके पर पहुंच गए। जिसके कुछ देर बाद राजकुमार ने घर में आग लगा दी। जिसे ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास करके बुझा दिया। घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहंुंची पुलिस ने हत्यारोपी राजकुमार को हिरासत में ले लिया और मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद जेल भेज दिया। साथ ही न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल किया था।
बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश शेषमणि शुक्ला ने इस मामले में दोष सिद्ध होने पर हत्योरापी पिता राजकुमार को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 12,000 रुपये के अर्थदण्ड से भी दण्डित किया।
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