बैतूल , फरवरी 19 -- बैतूल जिले की चिचोली नगर परिषद में करोड़ों रुपये की खरीदी, निर्माण कार्य और राजस्व वसूली में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। वार्ड क्रमांक 15 की पार्षद नेहा आर्य ने कलेक्टर को आवेदन देकर मुख्य नगरपालिका अधिकारी सैयद आरीफ हुसैन पर वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। उन्होंने सीएमओ को तत्काल हटाकर पूरे कार्यकाल की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

शिकायत में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक जैम पोर्टल के माध्यम से खरीदी गई सामग्रियां बाजार दर से अधिक कीमत पर ली गईं और टेंडर की मूल सामग्री के स्थान पर डमी सामग्री खरीदे जाने की आशंका है। पार्षद ने सभी सामग्रियों का भौतिक सत्यापन कराए जाने की मांग की है।

एलईडी हाईमास्क लाइट की खरीदी में भी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। विभागीय जांच में यह पाया गया कि खरीदी टुकड़ों में की गई, जो मध्यप्रदेश नगरपालिका लेखा एवं वित्त नियम 2018 के नियम 120 का उल्लंघन है। जांच प्रतिवेदन में सीएमओ को दोषी बताए जाने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाए गए हैं।

शिकायत में कॉढर घाट स्थित मोक्षधाम पर 4 लाख 99 हजार 900 रुपये की लागत से 100 आरसीसी कुर्सियां खरीदे जाने का उल्लेख है, जबकि मौके पर केवल 15 से 20 कुर्सियां ही मौजूद बताई गईं। शेष कुर्सियों का भुगतान बिना खरीदी के किए जाने का आरोप लगाया गया है।

इसके अलावा वार्ड क्रमांक 9 स्थित तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए पेविंग ब्लॉक, फाउंटेन, लाइटिंग, वाटर स्पोर्ट्स, बाउंड्रीवाल और अन्य कार्यों के लिए राशि आहरित किए जाने के बावजूद अधिकांश कार्य अधूरे होने की बात कही गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दादाजी कंस्ट्रक्शन चिचोली और जय जुगनीया ड्रिलिंग कम्पनी खेड़ी सावलीगढ़ को लगातार कार्य दिए गए और ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी कर अधिक दरों पर टेंडर स्वीकृत किए गए। बारंगवाड़ी मोक्षधाम पर 28 लाख रुपये की लागत से बने कार्टन वॉल निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

पार्षद ने साप्ताहिक और दैनिक बाजार वसूली में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार जिले के सबसे बड़े साप्ताहिक बाजार की आय मात्र 6 हजार रुपये प्रति सप्ताह दर्शाई गई, जबकि वास्तविक आय 25 से 30 हजार रुपये तक बताई गई है। दैनिक बाजार से भी 3 से 4 हजार रुपये प्रतिदिन की वसूली का दावा किया गया है।

इसके अलावा जेसीबी और अन्य मशीनों के कार्य में वास्तविक समय से अधिक घंटों का बिल लगाने, मस्टरोल में फर्जी कर्मचारियों को दर्शाकर भुगतान करने तथा सड़क निर्माण कार्यों में तकनीकी त्रुटियों के आरोप भी लगाए गए हैं। वार्ड क्रमांक 6 स्थित मंडई घाट निर्माण के लिए स्वीकृत राशि और टेंडर जारी होने के बावजूद 7 से 8 वर्षों से निर्माण अधूरा बताया गया है। पार्षद ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और नगर परिषद में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

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