वाराणसी , अक्टूबर 08 -- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), नई दिल्ली ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) को पोस्ट-कालाजार डर्मल लीशमैनियासिस (पीकेडीएल) के प्रभावी उपचार एवं नियंत्रण के लिए चिकित्सीय उपाय विकसित करने के लिये पांच करोड़ रुपये का शोध अनुदान स्वीकृत किया है।
आईसीएमआर ने बीएचयू को पटना स्थित राजेंद्र मेमोरियल राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के सहयोगी केंद्र के रूप में चयनित किया है। यह परियोजना बीएचयू, बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ और राजेंद्र मेमोरियल राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान, पटना के बीच सहयोगात्मक शोध का हिस्सा है।
परियोजना के तहत पीकेडीएल के बेहतर उपचार एवं प्रबंधन के लिए एक नवीन चिकित्सीय फॉर्मूलेशन विकसित और उसका मूल्यांकन किया जाएगा। इसका उद्देश्य त्वचा के घावों के प्रभावी उपचार के साथ त्वचा के सामान्य रंग की पुनर्बहाली को बेहतर बनाना है। शोध से अनुवादात्मक अनुसंधान, युवा शोधकर्ताओं के प्रशिक्षण और वैज्ञानिक क्षमता निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा।
परियोजना का नेतृत्व बीएचयू के विज्ञान संस्थान के जैव रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर प्रो. राकेश कुमार सिंह करेंगे। वह इसके प्रधान अन्वेषक होंगे। शोध में पटना, लखनऊ और वाराणसी के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।
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