बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) , अक्टूबर 06 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को कहा कि चिकित्सा पेशे का मूल उद्देश्य मानवता की निस्वार्थ सेवा होना चाहिए। वह यहां बने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रथम दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि लोगों को संबोधित कर रही थीं।
राष्ट्रपति ने कहा कि जब कोई मरीज डॉक्टर के पास आता है तो वह बीमारी के डर के साथ-साथ एक उम्मीद भी लेकर आता है। डॉक्टर अपने ज्ञान और कौशल से इलाज तो करता ही है, लेकिन उसका संवेदनशील और करुणापूर्ण व्यवहार मरीज को बीमारी से लड़ने की असली हिम्मत देता है। उन्होंने युवा डॉक्टरों से अपने पेशे में उत्कृष्टता के साथ-साथ संवेदनशीलता अपनाने का आह्वान किया।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि न्यूनतम लागत में विश्वस्तरीय और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना एम्स की मूल पहचान है। देश के विभिन्न हिस्सों में नए एम्स की स्थापना का उद्देश्य यही है कि अधिक से अधिक लोगों को इस भरोसे का लाभ मिले और मेधावी छात्र उच्च कोटि की शिक्षा प्राप्त कर सकें।
एम्स बिलासपुर की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में बसी आबादी तक समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना एक बहुआयामी चुनौती है। उन्होंने एम्स बिलासपुर को एक अग्रणी 'तृतीयक स्वास्थ्य केंद्र' के रूप में विकसित होने पर बल दिया। इसके लिए उन्होंने टेलीमेडिसिन, दूरस्थ क्षेत्रों के लिए विशेषज्ञ परामर्श और नवीनतम तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने की की आवश्यकता जतायी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित