पटना , अक्टूबर 28 -- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को एम्स पटना में 'चिकित्सा उपकरणों के मानकीकरण के माध्यम से मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना' विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और उनके प्रभावी उपयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा, "चिकित्सा उपकरणों का मानकीकरण मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बेहद जरूरी है। उपकरणों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने से इलाज की गुणवत्ता बेहतर बनाने और मरीजों का भरोसा मजबूत करने में मदद मिलती है।"संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में एम्स पटना की डीन (एकेडमिक्स) प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी, डीन (रिसर्च) प्रो. (डॉ.) संजय पांडेय, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, बीआईएस के मेडिकल इक्विपमेंट एंड हॉस्पिटल डिवाइसेज (एमएचडी) विभाग के निदेशक एवं प्रमुख श्री सुमित सेंगर तथा एम्स पटना के फार्माकोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. प्रमोद कुमार मांझी उपस्थित थे।
सुमित सेंगर ने स्वास्थ्य सेवाओं में मानकीकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, "चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में मानकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मानक निर्धारण करने वाली संस्थाओं और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय तथा उपकरणों की प्रभावी निगरानी से चिकित्सा तकनीक के प्रति भरोसा बढ़ाने और मरीजों को अधिक सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।"बीआईएस के कार्तिक रेड्डी ने राष्ट्रीय गुणवत्ता व्यवस्था और मानकीकरण में बीआईएस की भूमिका पर प्रस्तुति दी। वहीं, एनआईपीईआर हाजीपुर के आईपीसी-एमवीपीआई के आरटीसी समन्वयक डॉ. समीर धींगरा ने चिकित्सा उपकरणों और इन-विट्रो डायग्नोस्टिक डिवाइस (आईवीडी) की सुरक्षा निगरानी पर चर्चा की। उन्होंने संभावित जोखिमों की पहचान और उपकरणों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखने के महत्व को रेखांकित किया। बीआईएस के एमएचडी विभाग के पवन कुमार ने मानक निर्धारण की प्रक्रिया में इस विभाग की भूमिका पर जानकारी दी।
संगोष्ठी का प्रमुख आकर्षण 'बीआईएस स्नैप और मरीजों की सुरक्षा के क्षेत्रीय अनुभवों से मिली सीख' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा रही। बीआईएस के कार्तिक रेड्डी ने चर्चा का संचालन किया। इसमें एम्स पटना के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. संजीव कुमार, ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. अनूप कुमार, कार्डियोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. अनुपम भंभानी तथा कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. प्रगति कपूर ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने मरीजों की सुरक्षा से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों और चिकित्सा सेवाओं में गुणवत्ता मानकों के महत्व पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम में ओपन हाउस चर्चा भी आयोजित की गई जिसमें प्रतिभागियों को मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा उपकरणों के मानकीकरण से जुड़े विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिला।
संगोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया कि चिकित्सा उपकरणों के लिए मजबूत गुणवत्ता मानक, उनकी प्रभावी सुरक्षा निगरानी और स्वास्थ्य संस्थानों तथा मानक निर्धारण करने वाली संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल मरीजों की सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस पहल ने सुरक्षित चिकित्सा तकनीक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मानकीकरण की आवश्यकता को रेखांकित किया।
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