विजयवाड़ा , अक्टूबर 26 -- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को चिकित्सा संस्थानों से अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि चिकित्सा अनुसंधान का उपयोग मानवता की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए किया जाना चाहिए।
श्री राधाकृष्णन ने यहां डॉ. एनटीआर स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के 40वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित रूबी जयंती समारोह को संबोधित कर करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा का मूल आधार करुणा है और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल मानवता की सेवा के लिए होना चाहिए। डॉक्टर-मरीज के संबंधों में मानवीय जुड़ाव और संवेदनशीलता का स्थान तकनीक नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और महान नेता डॉ. नंदमुरी तारक राम राव की दूरदर्शिता का प्रतीक है। डॉ. एनटीआर ने क्षेत्रीय सीमाओं से परे सोचते हुए जनसेवा और राष्ट्र कल्याण को प्राथमिकता दी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 थी, जो अब बढ़कर 846 हो गयी है। इसी तरह, एमबीबीएस की सीटें लगभग 51 हजार से बढ़कर 1.40 लाख से अधिक हो गयी हैं, जबकि स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों की संख्या करीब 31 हजार से बढ़कर 86 हजार से अधिक पहुंच गयी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के बाद अब अनुसंधान और नवाचार को अगला महत्वपूर्ण पड़ाव बनाना होगा।
उपराष्ट्रपति ने प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से वर्तमान स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान के लिए समर्पित भाव से काम करने की अपील की। उन्होंने उम्मीद जतायी कि डॉ. एनटीआर स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के शोधकर्ता चिकित्सा विज्ञान में उल्लेखनीय योगदान देकर नोबेल पुरस्कार सहित वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल करेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय को अग्रणी संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया, ताकि विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को उन्नत अनुसंधान तथा नई तकनीकों के बारे में जानकारी मिल सके।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल स्वास्थ्य, टेलीमेडिसिन और उन्नत निदान तकनीकें स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव ला रही हैं , हालांकि इन तकनीकों का उपयोग वैज्ञानिक प्रमाणों, मरीजों की सुरक्षा, डेटा की गोपनीयता और नैतिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी प्रगति का अंतिम उद्देश्य मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और मानवता की सेवा करना होना चाहिए।
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