रायपुर , जुलाई 05 -- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को कहा है कि 'चिंतन शिविर 3.0' केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि सुशासन, प्रशासनिक सुधार और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में ठोस पहल का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिविर से प्राप्त सुझावों को शीघ्र ही नीतिगत एवं प्रशासनिक निर्णयों के रूप में लागू किया जाएगा।
सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय 'चिंतन शिविर 3.0' के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शिविर से निकले विचार विकसित छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई दिशा देंगे।
उन्होंने बताया कि पिछले दो चिंतन शिविरों से प्राप्त सुझावों के आधार पर मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई, जिससे फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी हुई। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से शिकायतों के त्वरित निराकरण की व्यवस्था बनी तथा 'सेवा सेतु' के जरिए 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि विचारों का धरातल पर परिणाम के रूप में दिखाई देना ही चिंतन प्रक्रिया की सबसे बड़ी सफलता है।
शिविर के दूसरे दिन 'सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन' विषय पर आयोजित सत्र में पर्यटन नीति विशेषज्ञ सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी, निवेश और उत्तरदायी पर्यटन मॉडल को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
'सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति' विषय पर सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने जिला-केंद्रित विकास मॉडल की वकालत करते हुए प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय आर्थिक क्षमता पर आधारित विकास रणनीति तैयार करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इससे उद्यमिता, रोजगार, कृषि परिवर्तन और स्थानीय नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और नेतृत्व विकास पर अपने विचार रखे।
शिविर में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकी, पर्यटन, कृषि समृद्धि और विकासपरक राजनीति जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत प्रस्तुति दी। उद्घाटन सत्र में आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने मूल्य-आधारित नेतृत्व और जनोन्मुखी प्रशासन पर बल दिया, जबकि नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, ब्लॉकचेन और डेटा आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
'कृषि से समृद्धि' विषयक सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीक आधारित कृषि मॉडल पर सुझाव दिए।
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