, Aug. 7 -- कर्नल राठौड़ बताया कि श्रीअन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के लिए श्रीअन्न प्रमोशन एजेंसी की स्थापना भी की जायेगी। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों, श्रीअन्न इकाइयों तथा प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 50 लाख रुपये तक के ऋण पर 60 प्रतिशत, 50 से 100 लाख रुपये तक के ऋण पर 50 प्रतिशत तथा एक करोड़ रुपये से अधिक के ऋण पर 40 प्रतिशत की दर से (अधिकतम 1 करोड़ 50 लाख रुपये तक) का पूंजीगत अनुदान देय होगा। एफपीओ, टीएसपी क्षेत्रों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पांच प्रतिशत पूंजीगत अनुदान का विशेष प्रावधान रखा गया है। कोल्ड स्टोरेज, साइलोज एवं निर्यात हेतु अनुदान राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति, 2024 के प्रावधानों के अनुसार देय होगा तथा कृषि व खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाएं रिप्स 2024 के एमएसएमई मानक पैकेज के अंतर्गत भी पूंजीगत अनुदान के लिए आवेदन कर सकेंगी।

उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने कृषि जिन्सों के प्रसंस्करण, व्यवसाय एवं निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजस्थान फूड पार्क विकास नीति, 2026 का अनुमोदन भी किया है। प्रदेश में कई स्थानों पर फूड पार्कों के विकास के लिए भूमि का आवंटन किया गया है। विश्वस्तरीय फूड पार्कों की स्थापना, संचालन एवं प्रबंधन के लिए यह नयी नीति तैयार की गयी है। इस नीति के अंतर्गत राज्य के प्रत्येक जिले में क्लस्टर आधार पर चरणबद्ध रूप से फूड पार्क विकसित किये जायेंगे। उन्होंने बताया कि इस नीति के तहत खाद्य उत्पादों के संरक्षण, भंडारण, प्रसंस्करण एवं परिवहन हेतु एकीकृत सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेगी। उत्पादक समूहों एवं किसानों को मजबूत सप्लाई चेन के माध्यम से प्रसंस्करण इकाइयों एवं बाजारों से जोड़ा जायेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने बताया कि नीति में फूड पार्कों की स्थापना को भूमि स्वामित्व एवं विकास संबंधी मानदण्डों के आधार पर चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इसमें उन विकासकर्ताओं को वरीयता दी जाएगी जो राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट-2024 के तहत फूड पार्क विकास हेतु एमओयू धारक हैं अथवा जो प्रस्तावित फूड पार्क में न्यूनतम 10 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एंकर फूड प्रोसेसिंग इकाई स्थापित करने के इच्छुक हैं।

उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने श्रमिक हितों की रक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के सुव्यवस्थित संचालन के लिए राज्य में मजदूरी संहिता (राजस्थान) नियम, 2026 जारी करने की स्वीकृति दी है। इन नियमों में न्यूनतम मजदूरी एवं काम के घंटों को पारदर्शी तरीके से निर्धारित किया गया है। अब श्रमिकों के न्यूनतम वेतन को तय करने के लिए एक वैज्ञानिक फॉर्मूला और कौशल-आधारित वर्गीकरण अपनाया जाएगा। इसमें महंगाई भत्ते को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़कर साल में दो बार 1 अप्रेल और 1 अक्टूबर को संशोधित करने का प्रावधान किया गया है। इससे बढ़ती महंगाई के साथ वेतन में संतुलन बना रहेगा। सामान्य कार्य दिवस के लिए काम के निश्चित घंटे, आराम का अंतराल और रात्रि शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा हेतु पर्याप्त प्रावधान भी किये गये हैं।

उन्होंने बताया कि इन नियमों में सप्ताह में कार्य के 48 घंटे निर्धारित किये गये हैं। छह दिवसीय कार्य सप्ताह में कार्य अवधि, विश्राम अंतराल सहित, अधिकतम साढ़े दस घंटे प्रतिदिन होगी और सातवां दिन सवैतनिक अवकाश रहेगा। लगातार पांच घंटे कार्य के बाद आधे घंटे के विश्राम अंतराल का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि अवकाश के दिन कार्य करने पर कर्मचारी को ओवरटाइम दर पर वेतन के प्रावधान के साथ ही नियोक्ताओं के लिए वेतन पर्ची देना अनिवार्य किया गया है तथा वेतन से होने वाली कानूनी कटौतियों की सीमा एवं डिजिटल रजिस्टर के नियमों को भी स्पष्ट किया गया है।

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