लखनऊ , जुलाई 23 -- उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर उच्च शिक्षा क्षेत्र में भर्ती प्रक्रिया में देरी और शिक्षकों के वेतन भुगतान में लापरवाही का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि पिछले चार वर्षों में उच्च शिक्षा में एक भी नई नियुक्ति पूरी नहीं हो सकी, जबकि सरकारी महाविद्यालयों के शिक्षक और कर्मचारी वेतन के लिए परेशान हैं।
प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री डॉ. सी.पी. राय ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा वर्ष 2022 में विज्ञापन संख्या-51 के तहत 13 विषयों के 910 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
श्री राय के अनुसार, नए शिक्षा आयोग के गठन और अन्य कारणों से परीक्षा अप्रैल 2025 में हुई, लेकिन अनियमितताओं के चलते उसे रद्द करना पड़ा। बाद में 19 और 20 अप्रैल को दोबारा परीक्षा कराई गई और 22 जुलाई से 13 अगस्त तक प्रस्तावित साक्षात्कार भी न्यायिक प्रक्रिया के चलते स्थगित हो गए।
उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान 21 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी, जिसके कारण साक्षात्कार शुरू नहीं हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में 22 से अधिक भर्तियों में आरक्षण संबंधी अनियमितताएं हुई हैं तथा बेसिक शिक्षा विभाग में वर्ष 2018 के बाद नियमित स्तर पर भर्ती नहीं हो सकी है।
डॉ. राय ने उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ट्रेजरी की कोडिंग प्रणाली में बदलाव के कारण प्रदेश के स्नातक और परास्नातक महाविद्यालयों के शिक्षकों को जून माह का वेतन अब तक नहीं मिला है।
उनका कहना था कि जुलाई में प्रवेश, पुस्तकों, वर्दी और अन्य खर्चों के बीच वेतन नहीं मिलने से शिक्षकों और उनके परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को नई व्यवस्था लागू करने से पहले वेतन भुगतान की निरंतरता सुनिश्चित करनी चाहिए थी। कांग्रेस ने सरकार से भर्ती प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को दूर करने तथा शिक्षकों का लंबित वेतन शीघ्र जारी करने की मांग की है।
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