बैतूल , सितंबर 08 -- महाराष्ट्र के अमरावती जिले में चार लोगों की जान लेने वाली बाघिन पिंकी की रेस्क्यू अभियान के दौरान मौत हो गई। वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने शिरजगांव कसबा क्षेत्र में बाघिन को डार्ट कर बेहोश किया था, लेकिन इसके बाद वह होश में नहीं आ सकी। बाघिन की मौत के बाद चांदूरबाजार तहसील और आसपास के गांवों में व्याप्त दहशत फिलहाल खत्म हो गई है, हालांकि ट्रैंक्वलाइजेशन की प्रक्रिया और उसकी मौत के कारणों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पिंकी के हमलों में आष्टी के किसान राजाभाऊ भोयर, मोर्शी तहसील के भांबोरा निवासी चरणदास विखे, चांदूरबाजार तहसील के सोनौरी की 22 वर्षीय उर्मिला बाजीराव इवने और शिरजगांव कसबा के किसान दामू भाऊ आवारे की मौत हुई थी। लगातार हमलों के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल था और लोग अकेले खेतों तथा जंगल से लगे इलाकों में जाने से बच रहे थे। ग्रामीणों के अनुसार बाघिन ने कई मवेशियों का भी शिकार किया था।
दामू भाऊ आवारे पर हमले के बाद वन विभाग ने बाघिन की तलाश तेज कर दी थी। संभावित ठिकानों पर निगरानी और गश्त बढ़ाई गई थी। इसी दौरान शिरजगांव कसबा क्षेत्र में बाघिन की मौजूदगी की सूचना मिलने पर टीम ने इलाके की घेराबंदी कर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी।
उपयुक्त मौका मिलने पर रेस्क्यू टीम ने बाघिन को डार्ट कर ट्रैंक्वलाइज किया। बेहोश होने के बाद उसे कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन उसकी हालत बिगड़ गई और वह दोबारा होश में नहीं आ सकी। इस कार्रवाई में पुणे के रेस्क्यू चैरिटेबल ट्रस्ट के मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. हेमराज की भूमिका भी बताई गई है।
बाघिन की मौत के बाद अब यह जांच का विषय है कि ट्रैंक्वलाइजेशन के बाद उसकी शारीरिक स्थिति कैसी थी, उसे किस तरह की निगरानी में रखा गया और उसे होश में लाने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई। मौत के तत्काल कारणों का पता पोस्टमार्टम और निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद ही चल सकेगा।
बाघिन की मौत की सूचना मिलने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। वहीं, चार लोगों की मौत से प्रभावित परिवारों के लिए यह घटना गहरी त्रासदी बनी हुई है। पूर्व सांसद नवनीत राणा और भाजपा विधायक प्रवीण तायडे सहित स्थानीय स्तर पर वन विभाग से बाघिन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की गई थी।
वन विभाग के सामने अब क्षेत्र में निगरानी और गश्त जारी रखने की चुनौती है, ताकि जंगल से लगे गांवों में वन्यजीवों की गतिविधियों के कारण किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। बाघिन की मौत के साथ ग्रामीणों का तत्काल भय भले ही कम हुआ हो, लेकिन उसकी मौत के कारणों और रेस्क्यू प्रक्रिया से जुड़े सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।
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