हरिद्वार , जून, 11 -- उत्तराखंड में हरिद्वार के पिरान कलियर दरगाह परिसर से अपहृत सात माह के मासूम बच्चे को पुलिस ने महज चार दिनों के भीतर गुरुवार को सकुशल बरामद कर लिया। मामले में एक महिला समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने बच्चे का अपहरण अधिक पैंसे कमाने की नीयत से भीख मंगाने के लिए किया गया था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गत सात जून को बिहार निवासी कलसूम खातून अपने परिवार के साथ पिरान कलियर दरगाह में आई थीं। नमाज के दौरान उनके सात माह के नाती मोहम्मद अली रजा का अचानक अपहरण हो गया। घटना की सूचना मिलते ही थाना पिरान कलियर में मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर बच्चे की तलाश तेज कर दी गई।

जांच के दौरान पुलिस ने दरगाह परिसर, रुड़की-कलियर मार्ग, बस अड्डों, रेलवे स्टेशन और बाजारों में लगे करीब 250 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक दिव्यांग महिला और उसके साथ एक संदिग्ध युवक नजर आया। महिला की वैशाखियां और बच्चे के दोनों हाथों में छह-छह उंगलियां पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हुईं।

सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस आज लक्सर रेलवे स्टेशन के समीप पहुंची, जहां एक दिव्यांग महिला बच्चे को गोद में लेकर भीख मांग रही थी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया और महिला समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे और भीख मांगकर जीवनयापन करते थे। उन्होंने देखा था कि छोटे बच्चों को गोद में लेकर भीख मांगने वालों को अधिक पैसे मिलते हैं। इसी लालच में उन्होंने बच्चे के अपहरण की योजना बनाई। आरोपियों ने करीब एक सप्ताह तक बच्चे और उसके परिवार पर नजर रखी और सात जून की शाम मौका मिलते ही दरगाह परिसर से बच्चे का अपहरण कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों में समीर उर्फ सोनू उर्फ बड़ा निवासी गोल्डन कॉलोनी, लंढौरा, थाना मंगलौर तथा एक महिला शामिल है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर अग्रिम कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

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