नयी दिल्ली , अक्टूबर 31 -- वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह 42 साल की विशिष्ट सेवा के बाद शनिवार को सेवानिवृत्त हो गये।
एयर चीफ मार्शल सिंह एक अनुभवी फाइटर पायलट और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना की संचालन क्षमता, युद्ध की तैयारी और आधुनिकीकरण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वायुसेना प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल निर्णायक नेतृत्व और सैन्य तैयारियों पर विशेष ध्यान देने के लिए जाना जायेगा।
उनके कार्यकाल में ऑपरेशन सिंदूर एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। इस अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने अपनी युद्ध क्षमता, सटीक कार्रवाई और राष्ट्रीय उद्देश्यों के प्रति दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया। उनके नेतृत्व ने सभी तरह के सैन्य अभियानों में निर्णायक जवाब देने की वायुसेना की क्षमता को और मजबूत किया।
सैन्य नेतृत्व के अलावा, एयर चीफ मार्शल सिंह का वायुसेना के जवानों और अधिकारियों के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव भी उनके कार्यकाल की खास पहचान रहा। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि भारतीय वायुसेना की असली ताकत उसके जवान और अधिकारी हैं। उन्होंने युवा अधिकारियों, एयरमैन और कैडेट के साथ बातचीत के दौरान पेशेवर रवैये, जवाबदेही, पहल करने और सेवा के प्रति गर्व की भावना को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने भारतीय वायुसेना को तकनीकी रूप से मजबूत और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाने पर भी जोर दिया। इसके तहत स्वदेशी तकनीक, नये प्रयोगों और उभरती तकनीकों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
वायुसेना के मुताबिक, उनका नेतृत्व, सैन्य अभियानों के प्रति दृढ़ संकल्प और वायुसेना के जवानों के साथ उनका जुड़ाव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने चार दशक से भी लंबे सेवाकाल के अंतिम दिन आज सुबह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने वायु सेना स्टेशन में सलामी गारद का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने वायु सेना की कमान नवनियुक्त वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित को सौंपी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित